MGNREGA controversy: मनरेगा से गांधी नाम हटाने पर सियासी घमासान, प्रियंका गांधी ने सरकार से पूछे सवाल

Juli Gupta
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MGNREGA controversy:

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) का नाम बदले जाने के सरकार के कदम पर कड़ा ऐतराज जताया है। सोमवार को संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने सवाल किया कि महात्मा गांधी जैसे वैश्विक नेता का नाम योजना से हटाने के पीछे सरकार की असली मंशा क्या है। उन्होंने कहा कि गांधी न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में सबसे बड़े नेताओं में गिने जाते हैं, ऐसे में उनका नाम हटाना समझ से परे है।

नाम बदलने पर खर्च और प्राथमिकताओं पर सवाल

प्रियंका गांधी ने योजना का नाम बदलने में होने वाले खर्च को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय ऐसे फैसलों में समय और संसाधन बर्बाद कर रही है। उनका कहना था कि संसद में बहसें लोगों की समस्याओं पर केंद्रित होने के बजाय गैर-जरूरी विषयों पर भटक रही हैं, जिससे देश का समय और पैसा दोनों नष्ट हो रहे हैं।

मनरेगा की जगह नया कानून लाने की तैयारी

सरकार मौजूदा मनरेगा कानून को समाप्त कर उसकी जगह एक नया विधेयक लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून का नाम ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025’ (VB-G RAM G) रखा गया है। यह विधेयक ग्रामीण रोजगार और आजीविका के लिए एक नया ढांचा पेश करेगा और 2005 से लागू मनरेगा की जगह लेगा।

125 दिन के रोजगार की गारंटी का प्रस्ताव

नए विधेयक के तहत ग्रामीण परिवारों को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-रोजगार की कानूनी गारंटी देने का प्रावधान किया गया है। यह गारंटी उन परिवारों को मिलेगी, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से तैयार होंगे। सरकार का दावा है कि यह कदम ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।

सरकार का पक्ष

ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मनरेगा ने पिछले 20 वर्षों में ग्रामीण परिवारों को रोजगार सुरक्षा दी है। बदलते सामाजिक-आर्थिक हालात को देखते हुए इसे और मजबूत व आधुनिक बनाने की जरूरत है, इसी उद्देश्य से नया विधेयक लाया जा रहा है।

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