Lionel Messi India visit:
नई दिल्ली, एजेंसियां। अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मैसी का हालिया भारत दौरा भले ही चर्चा में रहा हो, लेकिन इसने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। कोलकाता, हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली और जामनगर तक फैले इस दौरे में भारी भीड़ उमड़ी, जिससे यह तो साफ हुआ कि भारत खेल सितारों के लिए एक बड़ा बाजार है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इस दौरे से भारतीय फुटबॉल को ठोस फायदा कम और तमाशा ज्यादा मिला।
GOAT इंडिया 2025 और प्रायोजित आयोजन
मैसी का यह दौरा ‘GOAT इंडिया 2025’ के तहत आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य कथित तौर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना था। लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण, अकादमी या इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर कोई ठोस पहल नजर नहीं आई। कई कार्यक्रमों में मैसी की मौजूदगी सीमित रही, जिससे दर्शकों में नाराजगी भी दिखी, खासकर कोलकाता में, जहां टिकट के ऊंचे दाम और छोटी उपस्थिति पर बवाल हुआ।
राजनीति, ब्रांडिंग और सेलेब्रिटी मुलाकातें
दौरे के दौरान मैसी ने कई राजनीतिक और खेल हस्तियों से मुलाकात की—सचिन तेंदुलकर, सुनील छेत्री, राहुल गांधी, मुख्यमंत्री और खेल प्रशासकों से भी। मुंबई में उन्होंने राज्य सरकार की एक परियोजना का शुभारंभ किया, जबकि जामनगर में निजी चिड़ियाघर का दौरा भी चर्चा में रहा। इससे यह सवाल और गहराया कि क्या यह दौरा खेल विकास से ज्यादा ब्रांडिंग और प्रचार का मंच था।
खेल जगत की आलोचना और आत्ममंथन की जरूरत
अभिनव बिंद्रा, विनेश फोगाट और बाइचुंग भूटिया जैसे दिग्गजों ने इस दौरे पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि विदेशी सितारों के भव्य स्वागत से ज्यादा जरूरी है देश में खेल संस्कृति और जमीनी ढांचे का निर्माण। आलोचकों के मुताबिक, मैसी के नाम पर हुए खर्च को अगर फुटबॉल अकादमियों और ग्रामीण प्रतिभाओं पर लगाया जाता, तो देश को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता था।
कुल मिलाकर, मैसी का भारत दौरा यादगार जरूर रहा, लेकिन इसने भारतीय खेल नीति और प्राथमिकताओं पर आत्मनिरीक्षण की जरूरत भी उजागर कर दी।

