Manoj Jarange :
मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले दिनों सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की रही, वह है मनोज जरांगे पाटिल। साधारण किसान परिवार से निकलकर वह आज मराठा आरक्षण आंदोलन का चेहरा बन गए हैं और सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया है।
कौन हैं मनोज जरांगे?
मनोज जरांगे पाटिल का जन्म 1 अगस्त 1982 को बीड जिले के माटोरी गांव में हुआ था। बाद में उनका परिवार शहागढ़ में बस गया। वह मराठा जाति से आते हैं। परिवार में पत्नी सुमित्रा, तीन बेटियां और एक बेटा।चार भाइयों में सबसे छोटे और माता-पिता के साथ रहते हैं।किसान परिवार से होने के बावजूद समाजसेवा और आंदोलनों में खुद को समर्पित कर दिया।
कितने पढ़े-लिखे हैं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक मनोज जरांगे ने 12वीं तक पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़कर पूरी तरह समाज और आंदोलन के लिए काम करना शुरू किया। शिक्षा ज्यादा न होने के बावजूद उनकी नेतृत्व क्षमता और सामाजिक मुद्दों पर पकड़ ने उन्हें लाखों लोगों की आवाज बना दिया।
आंदोलन और ‘शिवबा संगठन’
जरांगे ने कई साल पहले मराठा आरक्षण की लड़ाई शुरू की थी।
शुरुआत स्थानीय स्तर के प्रदर्शनों से हुई।
धीरे-धीरे उन्होंने ‘शिवबा संगठन’ (Shivba Sanghatana) बनाया।
इसके जरिए मराठा समुदाय को शांतिपूर्ण लेकिन असरदार तरीके से एकजुट किया।
सरकार पर असर
हाल ही में उनकी भूख हड़ताल ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी। आंदोलन का दबाव इतना बढ़ा कि महाराष्ट्र सरकार ने उनकी 8 में से 6 मांगें मान लीं।
मंत्रिमंडल उपसमिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल और अन्य नेताओं ने उनसे मुलाकात की।
समझौते के बाद जरांगे ने भूख हड़ताल खत्म करने का ऐलान किया।
उन्होंने इसे जनता और मराठा युवाओं की जीत बताया।
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