Makar Sankranti
नई दिल्ली, एजेंसियां। मकर संक्रांति हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है, जिसे दान-पुण्य, आत्मशुद्धि और सूर्य उपासना का विशेष दिन माना जाता है। लेकिन इस साल मकर संक्रांति की तारीख को लेकर काफी ज्यादा कन्फ्यूजन हो रहा है। कोई 14 जनवरी तो कोई 15 जनवरी को मकर संक्रांति की सही डेट बता रहा है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाना ज्यादा उचित रहेगा।
जिसके पीछे दो कारण बताए गए हैं। धर्म विशेषज्ञों अनुसार, 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है और एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है इसलिए इस दिन खिचड़ी का सेवन नहीं किया जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ 14 तारीख को मकर संक्रांति दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से लग रही है और संक्रांति से जुड़े विशेष अनुष्ठान सुबह के समय में ही संपन्न किए जाते हैं। जिस वजह से भी मकर संक्रांति मनाने के लिए 15 जनवरी का दिन ही ज्यादा उत्तम माना जा रहा है। इसका कारण है मकर संक्रांति का पुण्य काल मुहूर्त 15 जनवरी को सूर्योदय से लेकर दोपहर 1 बजे तक रहेगा। ये मुहूर्त स्नान, दान और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद शुभ है।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व क्या है?
पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी को मना सकते है । इस दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण काल की शुरुआत होती है, जिसे शुभ ऊर्जा, स्थिरता और धर्म के विस्तार का समय माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किए गए उपाय और पूजा जीवन में स्थिरता, स्वास्थ्य और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जिस किसी के राशि में सूर्य दोष हो उससे मुक्ति पाने के लिए मकर संक्रांति के दिन विशेष उपाय करना अत्यंत शुभ माना गया है। सबसे पहला उपाय है स्नान और सूर्य आराधना।
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा या पवित्र जल से स्नान करना चाहिए। स्नान के पश्चात साफ और सात्विक वस्त्र धारण कर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें। तांबे के पात्र में जल, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालकर सूर्य को अर्घ्य देना श्रेष्ठ उपाय है। अर्घ्य देने के समय सूर्य मंत्र या गायत्री मंत्र का जप करना विशेष पुण्यदायी होता है। तिल, गुड़, अन्न और वस्त्र का दान भी लाभकारी माना गया है। श्रद्धा से किए गए ये उपाय स्वास्थ्य, करियर और सम्मान में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं।
मकर संक्रांति को “खिचड़ी पर्व” भी कहा जाता है
इतना ही नहीं मकर संक्रांति को कई राज्यों में “खिचड़ी पर्व” भी कहा जाता है। इस दिन खिचड़ी बनाना, खाना और दान करना एक पुरानी परंपरा है। खिचड़ी में इस्तेमाल होने वाले चावल, दाल और घी को सात्विक भोजन माना गया है, जो सूर्यदेव को अर्पित करने के लिए श्रेष्ठ होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन खिचड़ी का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खिचड़ी की परंपरा बाबा गोरखनाथ से जुड़ी है। कठिन परिस्थितियों में साधु-संतों के लिए यह भोजन जल्दी बनने वाला, पौष्टिक और ऊर्जा देने वाला माना गया। धीरे-धीरे यह परंपरा समाज में फैल गई और मकर संक्रांति से जुड़ गई।
शास्त्रों में कन्याओं को देवी का स्वरूप माना गया है। मकर संक्रांति जैसे पावन पर्व पर कन्याओं को अन्न, वस्त्र और उपयोगी वस्तुएं दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन कन्याओं को किया गया दान सूर्यदेव और देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा दिलाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।मकर संक्रांति पर कन्याओं को तिल-गुड़ से बनी सामग्री जैसे लड्डू या चिक्की, नए और स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर ऊनी कपड़े), चावल, दालें, गेहूं, खिचड़ी सामग्री, फल और शिक्षा से जुड़ी सामग्री जैसे कॉपी-किताब दान करना शुभ माना गया है।
इस दिन क्या न करें?
शास्त्रों के अनुसार, इस पर्व पर लहसुन, प्याज, मांस, शराब और अन्य तामसिक भोजन का सेवन वर्जित माना गया है। कई जगहों पर इस दिन रोटी बनाने से भी परहेज किया जाता है और खिचड़ी को विशेष पुण्यदायी भोजन माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन पेड़ों की कटाई या पौधों की छंटाई नहीं करनी चाहिए। यही कारण है कि कई किसान इस दिन फसल काटने से भी बचते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे प्रकृति और सूर्य देव दोनों की कृपा बनी रहती है।
किन चीजों का दान न करें?
इस दिन कन्याओं को काले रंग के कपड़े, पुराने वस्त्र या बासी भोजन का दान नहीं करना चाहिए। साथ ही दान करते समय अहंकार, दिखावा या जल्दबाजी से बचना जरूरी है, क्योंकि दान का फल वस्तु से नहीं, बल्कि शुद्ध भावना और सम्मान से मिलता है।मकर संक्रांति पर श्रद्धा, संयम और सात्विकता के साथ किया गया दान न केवल पुण्य बढ़ाता है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करता है।

