Maharashtra budget 2026
मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। इस सत्र में राज्य की राजनीति और वित्तीय स्थिति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 6 मार्च को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। उनके पास वित्त मंत्रालय का प्रभार भी है, ऐसे में यह सत्र सरकार के लिए अहम परीक्षा माना जा रहा है।
9 लाख करोड़ का कर्ज बना बड़ी चुनौती
फडणवीस सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य पर बढ़ते कर्ज के बोझ को नियंत्रित करना है। अनुमान है कि महाराष्ट्र पर 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। सरकार ने राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में विकास परियोजनाओं पर खर्च और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
बड़ी परियोजनाओं पर फोकस
बजट में पुणे-नाशिक हाई-स्पीड रेल, मेट्रो नेटवर्क विस्तार, पालघर के वढवाण बंदरगाह का विकास और मुंबई वाटर मेट्रो जैसी परियोजनाओं के लिए प्रावधान किए जाने की संभावना है। साथ ही ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ जैसी सामाजिक योजनाओं को जारी रखने का संकेत मिल सकता है, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाते हैं।मराठवाड़ा और विदर्भ में मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए ‘जलवायु-अनुकूल खेती’ के लिए विशेष पैकेज की घोषणा भी संभव है।
विपक्ष की रणनीति
विपक्ष सरकार को औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन के आंकड़ों में अंतर को लेकर घेर सकता है। साथ ही चुनावी साल में वित्तीय अनुशासन की अनदेखी और लोकलुभावन योजनाओं पर सवाल उठाए जा सकते हैं।उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार के निधन के बाद बदले राजनीतिक समीकरण भी चर्चा में रहेंगे। एनसीपी (एसपी) के नेता पारदर्शी जांच की मांग उठा चुके हैं। यह मुद्दा सत्र में गूंज सकता है।
राज्यसभा चुनाव का गणित
सत्र के दौरान राज्यसभा की सात सीटों के लिए चुनाव भी प्रस्तावित हैं। एनसीपी (एसपी) प्रमुख Sharad Pawar और केंद्रीय मंत्री Ramdas Athawale का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। मौजूदा संख्या बल के अनुसार विपक्ष के पास केवल एक सीट जीतने की संभावना है, जिसे लेकर शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के बीच रस्साकशी चल रही है।288 सदस्यीय विधानसभा में महायुति के पास स्पष्ट बहुमत है, जबकि विपक्षी दलों की संख्या सीमित है। ऐसे में बजट सत्र में सियासी तकरार के साथ-साथ राज्यसभा चुनाव का अंकगणित भी चर्चा का केंद्र रहेगा।








