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नई दिल्ली, एजेंसियां। हिन्दू धर्म के अनुसार, भगवान विष्णु के दस अवतारों में से एक वराह अवतार भूदेवी को बचाने के लिए प्रकट हुआ था। शास्त्रों में वर्णित है कि जब भूदेवी ब्रह्मांडीय सागर में डूब गई थीं, तब विष्णु ने वराह रूप धारण कर उन्हें अपने दांतों पर उठाया और पृथ्वी को उसके निश्चित स्थान पर पुनर्स्थापित किया। इस अवतार के दौरान आकाश में गर्जना हुई और जल को चीरते हुए पृथ्वी को सुरक्षित किया गया।
सूअर के रूप में प्रकट होने का कारण
वराह रूप को सूअर के रूप में प्रकट होने का कारण इसकी शक्तिशाली प्रकृति और गहराई में जाने की क्षमता मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वराह अवतार का कार्य केवल उद्धार करना ही नहीं, बल्कि सूक्ष्म लोकों की पुनर्व्यवस्था करना भी है। तांत्रिक दृष्टि में वराह से जुड़ी देवी वाराही हैं, जो स्त्री ऊर्जा और धारण शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं।
शास्त्रों में वर्णित मंत्र, “ॐ नमः श्री वराहाय धरनुद्धरणाय च स्वाहा”, इस अवतार की दिव्य शक्तियों का आह्वान करने के लिए प्रयोग किया जाता है। वराह अवतार न तो जन्म लेते हैं और न ही मृत्यु, बल्कि जब भी ब्रह्मांड में अराजकता फैलती है, वे व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रकट होते हैं।
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