Supreme Court:
नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और राज्य चुनाव आयोग को 31 जनवरी 2026 तक राज्य में सभी स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने अधिकारियों को 10 अक्टूबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने का आदेश भी जारी किया। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अब आगे किसी भी विस्तार की अनुमति नहीं दी जाएगी।
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का कदम
सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उस आधार पर उठाया है कि 6 मई 2025 को जारी तर्कसंगत आदेश के बावजूद राज्य चुनाव आयोग ने पर्याप्त शीघ्रता से कार्रवाई नहीं की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी मई 2025 में चुनाव आयोग को आदेश दिया था कि स्थानीय निकाय चुनावों की अधिसूचना चार सप्ताह के भीतर जारी की जाए और चार महीने के भीतर चुनाव संपन्न कराए जाएँ।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को 28 जुलाई 2022 में चेतावनी भी दी थी कि अगर उसने चुनाव प्रक्रिया फिर से अधिसूचित नहीं की तो उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, महाराष्ट्र सरकार ने इसी बीच ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण वाला अध्यादेश लाया था, जिसे कोर्ट ने पहले रोक दिया था।
Supreme Court: ओबीसी आरक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में भी ओबीसी आरक्षण से जुड़े ट्रिपल टेस्ट के पालन को सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। इसमें कहा गया था कि जब तक ट्रिपल टेस्ट के मानदंड पूरे नहीं होते, तब तक ओबीसी सीटों को सामान्य श्रेणी के रूप में अधिसूचित किया जाएगा। ट्रिपल टेस्ट के तहत प्रत्येक स्थानीय निकाय में पिछड़े वर्ग के आंकड़े जुटाने, आयोग की सिफारिशों के अनुसार आरक्षण की गणना और यह सुनिश्चित करना कि कुल आरक्षित सीटें 50% से अधिक न हों, राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
इस फैसले के बाद अब महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया एक बार फिर सुस्पष्ट समयसीमा के साथ शुरू होगी, और चुनाव आयोग को इसके पालन में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
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