Kerala government news
तिरुवनंतपुरम, एजेंसियां। देशव्यापी बंद के ऐलान के बीच केरल सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई कर्मचारी हड़ताल में शामिल होता है या बिना अनुमति अनुपस्थित रहता है तो उस दिन की सैलरी काट ली जाएगी। सरकार ने ‘नो वर्क, नो पे’ का नियम लागू करने की घोषणा की है।
बुधवार देर रात जारी आदेश में कहा गया है कि हड़ताल वाले दिन बिना पूर्व अनुमति गैरहाजिरी को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित कर्मचारी का वेतन रोका जाएगा। यह नियम केवल उसी दिन प्रभावी रहेगा, जिस दिन हड़ताल होगी।
हड़ताल वाले दिन कड़ी शर्तों पर ही छुट्टी
सरकारी सर्कुलर के अनुसार, हड़ताल के दिन किसी भी प्रकार की सामान्य छुट्टी स्वीकृत नहीं की जाएगी। कर्मचारियों को केवल विशेष परिस्थितियों में ही अवकाश दिया जाएगा।
सिर्फ इन चार कारणों पर मिलेगी छुट्टी
- कर्मचारी या उसके करीबी रिश्तेदार (पति/पत्नी, बच्चे, माता-पिता) की गंभीर बीमारी
- कर्मचारी की परीक्षा
- कर्मचारी की मातृत्व (मैटरनिटी) से संबंधित स्थिति
- अन्य समान रूप से अत्यावश्यक कारण
इनके अतिरिक्त किसी भी कारण से ली गई छुट्टी को मान्य नहीं किया जाएगा और वेतन में कटौती की जाएगी।
इन मांगों को लेकर बुलाई गई है हड़ताल
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) सहित कई संगठनों ने देशव्यापी बंद का आह्वान किया है। हड़ताल चार श्रम संहिताओं, बिजली विधेयक-2025, बीज विधेयक-2025 और अन्य प्रस्तावित कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर की जा रही है।
संयुक्त किसान मोर्चा की किसानों से अपील
संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों से अपील की है कि वे श्रमिक संगठनों के साथ एकजुटता दिखाएं। उनकी प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी का कार्यान्वयन और विभिन्न श्रम कानूनों में संशोधन का विरोध शामिल है।
राज्य सरकार ने साफ किया है कि प्रशासनिक कार्य प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे और सरकारी कार्यालय सामान्य रूप से खुले रहेंगे। साथ ही कर्मचारियों से कर्तव्य पर उपस्थित रहने की अपील की गई है।

















