Justice Yashwant Verma:
नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा से संबंधित कैशकांड मामले में उनकी याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस वर्मा ने इस मामले में जांच कमेटी की रिपोर्ट को अमान्य घोषित करने और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा उन्हें पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी गई सिफारिश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र भेजना संवैधानिक और कानूनी था, और इससे किसी प्रकार का उल्लंघन नहीं हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला:
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने फैसला सुनाते हुए जस्टिस वर्मा की दलीलों को खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि जस्टिस वर्मा के आचरण से कोई विश्वास नहीं जगा, और मुख्य न्यायाधीश की प्रक्रिया को कानूनी और संवैधानिक रूप से मान्य माना। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि जलती हुई नकदी के वीडियो को अपलोड करना अनावश्यक था, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि जस्टिस वर्मा ने पहले कभी इसका विरोध नहीं किया और वे जांच प्रक्रिया में शामिल हुए थे।
कोर्ट का स्पष्ट बयान:
कोर्ट ने कहा कि जस्टिस वर्मा का आचरण जांच समिति के सामने होने के बावजूद किसी प्रकार के विश्वास का कारण नहीं बना। साथ ही, वीडियो अपलोड करने पर भी कोई आपत्ति नहीं उठाई गई, इसलिए यह कार्यवाही उचित मानी गई।
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