Judge Verma:
नई दिल्ली, एजेंसियां। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर से जली हुई नकदी बरामदगी के मामले में संसद ने जांच समिति गठित की है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि यदि संसद वर्मा को हटाती है, तो उन्हें पेंशन समेत अन्य लाभ नहीं मिलेंगे। ऐसे में जज वर्मा के लिए इस्तीफा देना ही सबसे बेहतर विकल्प बचता है।
जांच समिति में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के वरिष्ठ सदस्य
जांच समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील बी. वी. आचार्य शामिल हैं। 146 लोकसभा सदस्यों ने वर्मा को हटाने की मांग की है, जिसमें भाजपा के रवि शंकर प्रसाद और कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी शामिल हैं।
संसद से हटाए जाने पर लाभ नहीं मिलेगा
जजों की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया के जानकारों के अनुसार, यदि वर्मा इस्तीफा देते हैं तो वे सेवानिवृत्त जज के रूप में पेंशन और अन्य लाभ प्राप्त कर सकेंगे। लेकिन यदि संसद से हटाए जाते हैं, तो यह लाभ उन्हें नहीं मिलेंगे।
संविधान का अनुच्छेद 217 क्या कहता है?
संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत हाईकोर्ट के जज इस्तीफा स्वयं दे सकते हैं, जिसके लिए किसी स्वीकृति की जरूरत नहीं होती। वे इस्तीफा की तारीख भी निर्धारित कर सकते हैं और समय आने से पहले इसे वापस भी ले सकते हैं।
तत्कालीन CJI ने भी दिया था इस्तीफा देने का सुझाव
पूर्व चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर वर्मा को इस्तीफा देने का सुझाव दिया था, लेकिन जज वर्मा ने इस पर सहमति नहीं जताई।
जांच प्रक्रिया और महाभियोग
न्यायाधीश जांच अधिनियम 1968 के अनुसार, संसद में जब किसी जज को हटाने का प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो तीन सदस्यीय समिति जांच करती है और उसकी रिपोर्ट सदन में पेश की जाती है। इसके बाद बहस होती है और निर्णय लिया जाता है।
घर में लगी आग और नकदी बरामदगी
मार्च 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के जज रहते हुए वर्मा के घर में आग लगी थी, जिसमें जली हुई नकदी के बंडल मिले। सुप्रीम कोर्ट की समिति ने जांच के बाद उन्हें दोषी पाया था। इसके बाद उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा गया, जहां न्यायिक कार्य नहीं दिया गया।
इतिहास में महाभियोग से पहले इस्तीफा
पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के जज वी रामास्वामी और कोलकाता हाईकोर्ट के जज सौमित्र सेन को महाभियोग का सामना करना पड़ा था, लेकिन दोनों ने इस्तीफा दे दिया था। जज वर्मा के खिलाफ यह पहला मामला होगा जो नए संसद भवन में पेश होगा।
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