NCERT new module:
नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने भारत-पाकिस्तान के विभाजन से संबंधित एक नया शैक्षिक मॉड्यूल जारी किया है, जिसे “पार्टीशन हॉरर्स रिमेंबरेंस डे” कहा गया है। इस मॉड्यूल का उद्देश्य छात्रों को विभाजन के कारणों और इसके प्रभावों के बारे में जानकारी प्रदान करना है।
मॉड्यूल के अनुसार
मॉड्यूल में कहा गया है कि पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना ने विभाजन का प्रचार किया था। उनका नेतृत्व मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान की मांग को आगे बढ़ाने में निर्णायक था। कांग्रेस पर यह आरोप लगाया गया है कि उसने विभाजन को स्वीकार किया, जबकि इसके खिलाफ पार्टी में कुछ मत थे। इस मॉड्यूल में कांग्रेस को इस प्रक्रिया में शामिल माना गया है, जो विभाजन के परिणामों को अनदेखा करती है।
ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन
ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को विभाजन को लागू करने के लिए भेजा गया था। यह मॉड्यूल दावा करता है कि माउंटबेटन ने विभाजन के फैसले को लागू किया और भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद की समाप्ति के बाद इस महत्वपूर्ण निर्णय को लागू करने का कार्य किया। इसके अतिरिक्त, मॉड्यूल में यह भी कहा गया है कि विभाजन ने कश्मीर को भारत के लिए एक बड़ी सुरक्षा समस्या बना दिया। इसके बाद, पाकिस्तान ने इसे एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया है ताकि वह भारत पर दबाव बना सके।
कांग्रेस का विरोध:
कांग्रेस पार्टी ने इस मॉड्यूल पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी ने इसे “इतिहास के साथ छेड़छाड़” और “सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश करने” का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने मांग की है कि इस मॉड्यूल को तुरंत हटा दिया जाए और कहा कि इसे “जला देना चाहिए” क्योंकि इसमें सच्चाई से ज्यादा राजनीति झलकती है। कांग्रेस नेताओं ने इसे विभाजन के वास्तविक कारणों को नकारने की कोशिश बताया है और कहा है कि इससे छात्रों में भ्रम फैल सकता है।
सरकार का पक्ष:
NCERT ने इस मॉड्यूल को शिक्षकों और छात्रों के लिए एक संसाधन के रूप में पेश किया है ताकि वे विभाजन के इतिहास को सही रूप में समझ सकें। सरकार का कहना है कि यह मॉड्यूल छात्रों को विभाजन के बारे में व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
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