JEE Main 2026 Cut-off: कितनी पर्सेंटाइल पर खुलेगा एनआईटी और आईआईटी का रास्ता?

Juli Gupta
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JEE Main 2026 Cut-off:

नई दिल्ली, एजेंसियां। जेईई मेन 2026 की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए कटऑफ एक बेहद अहम पड़ाव है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा जारी की जाने वाली यह कटऑफ न केवल एनआईटी, ट्रिपल आईटी और अन्य केंद्रीय संस्थानों में दाखिले की पात्रता तय करती है, बल्कि जेईई एडवांस 2026 में बैठने का रास्ता भी खोलती है। आधिकारिक तौर पर जेईई मेन 2026 की कटऑफ परीक्षा के दूसरे सेशन यानी सेशन-2 के रिजल्ट के बाद जारी की जाएगी।

एनटीए जेईई मेन की कटऑफ पर्सेंटाइल के रूप में घोषित करता है। इसका मतलब यह है कि छात्रों को न्यूनतम क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल हासिल करनी होती है, तभी वे आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया और जेईई एडवांस के लिए योग्य माने जाते हैं। सेशन-1 और सेशन-2 की कटऑफ आमतौर पर समान होती है, क्योंकि यह क्वालिफाइंग मानक पर आधारित होती है।

कटऑफ क्यों है जरूरी?

जेईई मेन की कटऑफ केवल कॉलेज में एडमिशन तक सीमित नहीं है। जो छात्र कटऑफ से ऊपर स्कोर करते हैं, वही जेईई एडवांस परीक्षा दे सकते हैं, जिसके जरिए आईआईटी जैसे शीर्ष संस्थानों में दाखिला मिलता है। इसलिए हर उम्मीदवार के लिए कटऑफ को समझना और उसी के अनुसार रणनीति बनाना जरूरी है।

कैटेगरी वाइज अनुमानित कटऑफ

हालांकि आधिकारिक आंकड़े बाद में जारी होंगे, लेकिन पिछले वर्षों के ट्रेंड के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि सामान्य वर्ग के लिए कटऑफ 92–94 पर्सेंटाइल, ओबीसी-एनसीएल के लिए 80–83, ईडब्ल्यूएस के लिए 81–84, एससी के लिए 60–63 और एसटी वर्ग के लिए 48–50 पर्सेंटाइल के आसपास रह सकती है।

कटऑफ किन बातों पर निर्भर करती है?

कटऑफ का निर्धारण परीक्षा के कठिनाई स्तर, कुल अभ्यर्थियों की संख्या और उपलब्ध सीटों पर निर्भर करता है। पेपर कठिन होने पर कटऑफ घट सकती है, जबकि आसान पेपर होने पर इसमें बढ़ोतरी संभव है। ऐसे में छात्रों को अनुमानित कटऑफ के आधार पर अपनी तैयारी का आकलन करते रहना चाहिए।

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