Prashant Kishor
नई दिल्ली, एजेंसियां। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने चुनाव से पहले महिलाओं को सीधे 10,000 रुपये हस्तांतरित किए जाने को अवैध बताते हुए नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है।
जन सुराज पार्टी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिका में आरोप लगाया है कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ा गया और उन्हें भुगतान किया गया, जो संविधान का गंभीर उल्लंघन है।
25–35 लाख महिला वोटर्स को DBT पर सवाल
याचिका में कहा गया है कि चुनाव के दौरान 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को 10,000 रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की गई, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। पार्टी ने चुनाव आयोग को संविधान की धारा 324 के तहत इस मामले में कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग की है।
जीविका दीदियों की तैनाती पर भी आपत्ति
जन सुराज पार्टी ने दो चरणों में कराए गए मतदान के दौरान जीविका स्वयं सहायता समूह की करीब 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को पोलिंग बूथ पर तैनात किए जाने को भी अवैध और अनुचित बताया है।
सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को करेगी। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु राज्य (2013) मामले में दिए गए निर्देशों के अनुसार मुफ्त योजनाओं और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश तय किए जाएं।
जन सुराज पार्टी का कहना है कि कथित चुनावी अनियमितताओं और भ्रष्ट आचरण को देखते हुए बिहार में फिर से विधानसभा चुनाव कराना जरूरी है।












