ISRO rural science program:
बेंगलुरु, एजेंसियां। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष क्षेत्र में नए इतिहास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की है। उत्तर प्रदेश का महोबा अब देश का पहला ऐसा जिला बनने जा रहा है, जहां इसरो के ‘विलेज साइंटिस्ट’ कार्यक्रम के तहत 40 ग्रामीण स्पेस लैब स्थापित की जा रही हैं। सोमवार को इसरो अहमदाबाद के निदेशक वैज्ञानिक नीलेश एम. देसाई ने महोबा के रतौली गांव में पहली स्पेस लैब का उद्घाटन किया।लखनऊ की व्योमिका फाउंडेशन के सहयोग से स्थापित इस प्रयोगशाला का नाम ‘श्री नीलेश एम. देसाई स्पेस लैब’ रखा गया है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण छात्रों को आधुनिक विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान से जोड़ना है, ताकि वे भी बड़े सपने देख सकें और वैज्ञानिक बनने की दिशा में कदम बढ़ा सकें।
छात्रों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं
इन स्पेस लैब्स को आधुनिक और इंटरैक्टिव संसाधनों से सुसज्जित किया गया है। यहां छात्रों को वर्किंग टेलिस्कोप, 3डी प्रिंटर, रोबोट, ड्रोन और इसरो के विभिन्न मिशनों के मॉडल के जरिए व्यावहारिक शिक्षा दी जाएगी। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट एप्लीकेशन और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बेसिक शिक्षा अधिकारी के अनुसार
बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल मिश्रा के अनुसार, यह पहल जिलाधिकारी गजल भारद्वाज की सोच का परिणाम है। एक साल के विशेष पाठ्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों के कौशल का मूल्यांकन भी किया जाएगा, ताकि भविष्य के वैज्ञानिक तैयार किए जा सकें।
2040 तक का अंतरिक्ष रोडमैप
उद्घाटन कार्यक्रम में निदेशक नीलेश एम. देसाई ने छात्रों के साथ संवाद करते हुए इसरो की भविष्य की योजनाओं की झलक भी साझा की। उन्होंने बताया कि मानव रहित अंतरिक्ष मिशन की शुरुआत हो चुकी है और तीन मानवरहित यान भेजने का लक्ष्य है। इसके बाद मानवयुक्त मिशन भी भेजे जाएंगे।उन्होंने कहा कि 2033 तक भारत अपना स्पेस स्टेशन लॉन्च करने की दिशा में काम कर रहा है। वहीं 2040 तक चांद पर जाने वाले भारतीय अंतरिक्ष यात्री स्पेस स्टेशन का उपयोग कर सकेंगे।इस पहल से महोबा न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल जिला बनकर उभर रहा है। ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच की खाई पाटने की दिशा में यह कदम भविष्य के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी तैयार करने में अहम साबित हो सकता है।












