Budget impact on gold:
नई दिल्ली, एजेंसियां। बजट 2026 के दिन जहां संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भाषण चर्चा में रहा, वहीं कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी बुरी तरह टूटते नजर आए। बीते महज दो दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में ऐसी भारी गिरावट आई है, जिसने निवेशकों और आम खरीदारों को चौंका दिया है। जो कीमती धातुएं हाल ही में रिकॉर्ड ऊंचाई पर थीं, वे अब तेजी से नीचे फिसल गई हैं।
दो दिन में पलटा बाजार का मिजाज
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के मुताबिक, 29 जनवरी को चांदी 4.01 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, लेकिन अब यह गिरकर करीब 2.66 लाख रुपये पर आ गई है। यानी सिर्फ दो दिनों में चांदी के भाव में लगभग 1.36 लाख रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
वहीं सोना भी इस बिकवाली से अछूता नहीं रहा। 29 जनवरी को 1.69 लाख रुपये के स्तर पर पहुंचने वाला सोना अब वायदा बाजार में करीब 1.38 लाख रुपये पर कारोबार कर रहा है। 10 ग्राम सोने की कीमत में भी लगभग 30 हजार रुपये तक की गिरावट देखी गई है।
सर्राफा बाजार में भी असर
हालांकि बजट के दिन सर्राफा बाजार बंद रहा, लेकिन इससे पहले 30 जनवरी को ही सोना करीब 9,500 रुपये और चांदी 40 हजार रुपये तक सस्ती हो चुकी थी। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव 1.65 लाख रुपये और चांदी 3.39 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास आ गई थी।
गिरावट के पीछे क्या वजह?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस तेज गिरावट के दो बड़े कारण हैं। पहला, जबरदस्त मुनाफावसूली। ऑल टाइम हाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग की। दूसरा, ऊंचे दामों के चलते फिजिकल डिमांड में आई कमजोरी।
मार्जिन मनी ने बढ़ाया दबाव
सेबी रजिस्टर्ड कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) द्वारा सोने और चांदी पर मार्जिन बढ़ाए जाने से बिकवाली और तेज हुई। मार्जिन बढ़ने पर ट्रेडर्स को अतिरिक्त पैसा लगाना पड़ता है, और जब यह संभव नहीं होता, तो वे मजबूरी में अपनी पोजीशन बेच देते हैं। इसी वजह से बाजार में एक साथ भारी बिकवाली हुई और दाम तेजी से टूट गए।


















