IndiGo crisis:
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय विमानन क्षेत्र इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के परिचालन संकट ने हवाई यात्रा को आम आदमी की पहुंच से बाहर कर दिया है। तकनीकी परेशानियों और क्रू की कमी के चलते सैकड़ों उड़ानें रद्द हो रही हैं, जिसका सीधा असर हवाई किरायों पर पड़ा है।
विभिन्न ट्रैवल पोर्टल और बुकिंग वेबसाइटों के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिन रूट्स पर इंडिगो का दबदबा है, वहां सबसे ज्यादा मारामारी देखने को मिल रही है। घरेलू बाजार में इंडिगो की हिस्सेदारी 60% से अधिक होने के कारण उसकी समस्याओं से पूरा सिस्टम प्रभावित हुआ है। सामान्य दिनों में 6 से 8 हजार रुपये में मिलने वाले टिकट अब 50 से 60 हजार रुपये तक पहुँच गए हैं। सबसे अधिक प्रभावित रूट्स में कोलकाता, मुंबई, उदयपुर, पटना और दिल्ली शामिल हैं।
पटना से दिल्ली का किराया:
पटना से दिल्ली का किराया सामान्यतः 6 से 10 हजार रुपये के बीच होता था, लेकिन अब यह 66 हजार रुपये तक पहुँच गया है। इस वृद्धि का कारण केवल उड़ानों का रद्द होना ही नहीं है, बल्कि एयरलाइन की डायनामिक प्राइसिंग प्रणाली भी है। इंडिगो द्वारा रोजाना सैकड़ों उड़ानें रद्द होने से हजारों सीटें सिस्टम से गायब हो गई हैं, जबकि विस्तारा और एयर इंडिया जैसी अन्य एयरलाइंस की सीटें सीमित हैं। मांग में अचानक वृद्धि के कारण एल्गोरिदम कीमत को अधिकतम स्तर तक ले जाता है। इसके अलावा देश में शादियों और छुट्टियों का पीक सीजन भी इस संकट को बढ़ावा दे रहा है।
इंडिगो के अनुसार:
इंडिगो के अनुसार यह समस्या मुख्य रूप से नए Flight Duty Time Limitations (FDTL) नियमों के लागू होने और पायलटों की रोस्टरिंग में गड़बड़ी के कारण उत्पन्न हुई है। एयरलाइन ने माना है कि उनके पास आवश्यक क्रू की कमी है और परिचालन सामान्य होने में कुछ समय लगेगा। इस बीच, DGCA ने क्रू के विश्राम से जुड़े नियमों को अस्थायी रूप से वापस ले लिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू हवाई यात्रा की कीमतें अब विदेशी मार्गों से भी अधिक हो गई हैं और यात्रियों को हवाई सफर के लिए अतिरिक्त खर्च करने के लिए तैयार रहना होगा। इंडिगो संकट के चलते पूरे देश में हवाई यात्रा की सुलभता और कीमतों में भारी असंतुलन देखने को मिल रहा है।

