Indian railway network: भारतीय रेल का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, ब्रिटेन-रूस-चीन से आगे निकला भारतीय रेल नेटवर्क

2 Min Read

Indian railway network

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की जीवनरेखा कही जाने वाली भारतीय रेल ने एक ऐसा ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है, जिसने वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को मजबूत किया है। रेलवे विद्युतीकरण के क्षेत्र में भारत अब ब्रिटेन, रूस और चीन जैसे देशों से भी आगे निकल चुका है।

99.2 फीसदी ब्रॉड गेज नेटवर्क हुआ इलेक्ट्रिक

भारतीय रेल ने अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.2 फीसदी हिस्सा विद्युतीकृत कर लिया है। इसका अर्थ है कि अब देश में अधिकतर ट्रेनें डीजल के बजाय बिजली से संचालित हो रही हैं। यह न सिर्फ ईंधन की बड़ी बचत है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अहम कदम है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, भारत लगभग 100 फीसदी विद्युतीकरण के लक्ष्य को छूने के बेहद करीब है।

वैश्विक ताकतों से आगे भारत

आंकड़ों के अनुसार, जहां ब्रिटेन में केवल 39 फीसदी, रूस में 52 फीसदी और चीन में करीब 82 फीसदी रेलवे नेटवर्क ही इलेक्ट्रिफाइड है, वहीं भारत इस मामले में सबसे आगे है। यह बदलाव बीते एक दशक में तेज रफ्तार से हुआ है। वर्ष 2014 से 2025 के बीच 46,900 रूट किलोमीटर रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण किया गया, जो पिछले 60 वर्षों में हुए कुल काम से भी अधिक है।

14 रेलवे जोन और 25 राज्य पूरी तरह इलेक्ट्रिक

देश के 14 रेलवे जोन पूरी तरह विद्युतीकृत हो चुके हैं। इसके साथ ही 25 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में ब्रॉड गेज नेटवर्क का 100 फीसदी विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

पर्यावरण को होगा बड़ा लाभ

रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में करीब 89 फीसदी कम कार्बन उत्सर्जन करता है। यही कारण है कि भारतीय रेल को हरित परिवहन की रीढ़ माना जा रहा है। इसके अलावा 2,600 से अधिक स्टेशनों पर सोलर पावर की शुरुआत हो चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारतीय रेल को नेट-जीरो कार्बन एमिटर बनाया जाए।

Share This Article