India Myanmar drug racket:
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत-म्यांमार ड्रग तस्करी नेटवर्क की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी ने पाया कि म्यांमार के नागरिक भारतीय नागरिकों के GST प्रमाणपत्र और क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग करके मेथामफेटामिन बनाने में उपयोग होने वाले सूडोइफेड्रिन और कैफीन एन्हाइड्रस जैसे रसायनों की खरीद कर रहे थे। ये रसायन मादक पदार्थ बनाने का प्रमुख कच्चा माल हैं।
भारत-म्यांमार बॉर्डर पर पहली बार ED की तलाशी:
27 नवंबर को ED ने मिजोरम के आइजोल और चंपाई (भारत-म्यांमार सीमा) पर पहली बार तलाशी अभियान चलाया। इसके साथ ही असम के करीमगंज और गुजरात के अहमदाबाद में भी छापेमारी की गई। जांच में सामने आया कि भारतीय नागरिकों को म्यांमार मूल के लोगों के लिए ये रसायन खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया, जिससे संपूर्ण ड्रग सप्लाई चेन को वैध दिखाया जा सके।
क्या मिला सबूतों में?
भारतीय नागरिकों के GST दस्तावेज़ों का उपयोग कर ड्रग निर्माण के कच्चे माल की खरीद हुई। यह कच्चा माल म्यांमार भेजकर सीमापार मेथामफेटामिन तैयार किया जा रहा था। ड्रग तस्करी के साथ-साथ बड़े पैमाने पर धन शोधन और हवाला लेनदेन भी किया जा रहा था। नेटवर्क की जड़ें मिजोरम से लेकर कई भारतीय राज्यों तक फैली हुई थीं।
कैश और खातों की कार्रवाई:
हवाला संचालकों सहित कई लोगों से 46.7 लाख रुपये नकद जब्त। 21 बैंक खाते फ्रीज किए गए। ED की यह कार्रवाई मिजोरम पुलिस की उस FIR से जुड़ी है जिसमें 4.72 किलो हेरोइन बरामद की गई थी।
सीमा के संवेदनशील इलाकों का इस्तेमाल:
जांच में यह भी सामने आया कि ड्रग रैकेट ने मिजोरम जैसी पोरस (खुली) सीमा का फायदा उठाकर तस्करी को अंजाम दिया। यह नेटवर्क भारत से वित्तीय मदद और दस्तावेज़ लेकर म्यांमार में ड्रग निर्माण को बढ़ावा देता रहा। यह खुलासा क्रॉस-बॉर्डर ड्रग माफिया और भारत में हो रहे दस्तावेज़ दुरुपयोग के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।







