India EU FTA deal:
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत पूरी हो गई है। यह अब तक दोनों पक्षों के बीच हुआ सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी व्यापार समझौता माना जा रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से गुजर रही है, यह डील नियम-आधारित और खुले वैश्विक व्यापार के प्रति भारत और EU की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भारतीय उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा
- इस समझौते के तहत यूरोप से आयात होने वाले कई औद्योगिक और तकनीकी उत्पाद सस्ते होंगे।
- केमिकल्स पर लगने वाली 22% तक की ड्यूटी ज्यादातर मामलों में खत्म होगी।
- मशीनरी पर 44% तक के ऊंचे टैरिफ हटाए जाएंगे, जिससे उद्योगों की लागत घटेगी।
- फार्मास्यूटिकल्स पर 11% तक की ड्यूटी लगभग समाप्त होगी।
- मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों के करीब 90% उत्पाद ड्यूटी-फ्री हो जाएंगे।
- विमान और अंतरिक्ष यान से जुड़े उत्पादों पर भी टैरिफ हटेंगे।
ऑटोमोबाइल और फूड सेक्टर को राहत
EU से आने वाली कारों पर टैरिफ चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10% किया जाएगा, वह भी सालाना 2.5 लाख वाहनों के कोटे के तहत। इससे प्रीमियम और लग्ज़री कारें सस्ती हो सकती हैं।
खाने-पीने की चीज़ों में जैतून का तेल, वाइन, बीयर, फलों के रस और प्रोसेस्ड फूड पर भी भारी टैरिफ कटौती होगी।
दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए क्यों अहम
भारत और EU के बीच फिलहाल सालाना 180 अरब यूरो से अधिक का व्यापार होता है। इस डील से EU के 96% से ज्यादा उत्पादों पर भारत में टैरिफ घटेगा। अनुमान है कि 2032 तक EU का भारत को निर्यात दोगुना हो सकता है। वहीं, भारतीय उद्योगों को सस्ते इनपुट, बेहतर तकनीक और नए बाजारों तक पहुंच मिलेगी।
भारत की अब तक की सबसे बड़ी व्यापारिक रियायत
यह समझौता भारत द्वारा किसी भी साझेदार को दी गई सबसे बड़ी व्यापारिक छूट है। इससे दोनों पक्षों के व्यापार, निवेश और रोजगार के अवसरों को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।











