India critical minerals alliance:
नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की अर्थव्यवस्था और तकनीकी ताकत अब केवल तेल और गैस पर नहीं, बल्कि क्रिटिकल मिनरल्स पर भी निर्भर होती जा रही है। इसी दिशा में अमेरिका, भारत समेत 54 देशों के साथ मिलकर एक नए अंतरराष्ट्रीय खनिज गठबंधन की शुरुआत कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य रेयर अर्थ और अन्य जरूरी खनिजों की वैश्विक सप्लाई पर चीन की मजबूत पकड़ को कम करना है।
वाशिंगटन में आयोजित 2026
वाशिंगटन में आयोजित 2026 क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल बैठक में इस गठबंधन की घोषणा की गई। बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट शामिल हुए, जबकि भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भाग लिया। इस पहल में भारत को एक प्रमुख साझेदार और संभावित वैश्विक हब के रूप में देखा जा रहा है।
इस योजना के तहत दो प्रमुख मंच बनाए जा रहे हैं। पहला FORGE है, जो खनिजों की सप्लाई और कीमतों को स्थिर रखने के लिए काम करेगा और इसकी जिम्मेदारी दक्षिण कोरिया को दी गई है। दूसरा मंच Pax Silica है, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-टेक उद्योगों के लिए जरूरी खनिजों की सप्लाई को भरोसेमंद देशों तक पहुंचाना है।
अमेरिका ने क्या संकेत दिया
अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत जैसे साझेदार देशों में खनन और रिफाइनिंग सेक्टर में लगभग 30 अरब डॉलर तक निवेश कर सकता है। इससे भारत को खनिज प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनने का अवसर मिलेगा।इसके अलावा, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ में कमी की घोषणा भी की है, जिससे बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर से जुड़े उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में वही देश वैश्विक शक्ति बनेगा, जिसके पास क्रिटिकल मिनरल्स की मजबूत आपूर्ति व्यवस्था होगी।







