कोलंबो से पहले लाहौर में हलचल
क्रिकेट की दुनिया में भारत और पाकिस्तान का मैच सबसे बड़ा होता है। कोलंबो में 15 फरवरी को यह महामुकाबला होने वाला है। लेकिन मैच से पहले पाकिस्तान ने नया पैंतरा चला है। लाहौर में 8 फरवरी को पीसीबी की एक अहम बैठक हुई। इसके बाद पाकिस्तान ने आईसीसी के सामने तीन बड़ी शर्तें रख दी हैं। अब पूरा खेल इन शर्तों के इर्द-गिर्द घूम रहा है।
इस पूरे विवाद तथा पाकिस्तान के बेबुनियाद शर्तों को इन तीन मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है:
1. आईसीसी रेवेन्यू में बड़ा हिस्सा: पाकिस्तान चाहता है कि आईसीसी की कमाई में उसका हिस्सा बढ़ाया जाए। वर्तमान में भारत को आईसीसी राजस्व का सबसे बड़ा भाग मिलता है। पाकिस्तान का तर्क है कि उनके बिना आईसीसी की कमाई संभव नहीं है। इसलिए वे अब अपने लिए ज्यादा फंड की मांग कर रहे हैं।
2. भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय सीरीज की बहाली: पाकिस्तान चाहता है कि भारत उनके साथ अलग से सीरीज खेले। साल 2012 के बाद से दोनों देशों के बीच कोई सीरीज नहीं हुई है। पीसीबी इसे लिखित आश्वासन के रूप में मांग रहा है। उनका मानना है कि इससे उनके बोर्ड की माली हालत सुधरेगी।
3. मैच के दौरान हैंडशेक प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करना: पाकिस्तान ने खिलाड़ियों के हाथ मिलाने पर सख्ती की मांग की है। पिछले कुछ मैचों में खिलाड़ियों के बीच दूरी देखी गई थी। पीसीबी चाहता है कि आईसीसी इसे अनिवार्य नियम बनाए। वे मैदान पर समानता का संदेश देना चाहते हैं।
भारत का क्या कहना है इस मुद्दे पर
इस मुद्दे पर भारत का नजरिया हमेशा से बहुत साफ रहा है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) अपनी सरकार के निर्देशों का पालन करता है।
- सुरक्षा पहले: भारत का मानना है कि सीमा पार तनाव और खेल साथ नहीं चल सकते।
- कोई दबाव नहीं: भारत किसी भी शर्त के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
- तैयारी पूरी: भारतीय टीम इस समय केवल अपने खेल पर ध्यान दे रही है।
- वैश्विक रसूख: बीसीसीआई जानता है कि पाकिस्तान का मैच छोड़ना खुद पाकिस्तान का नुकसान है।
क्या मुमकिन है और क्या नहीं?
पाकिस्तान की कुछ मांगें पूरी होना लगभग असंभव है। आईसीसी का रेवेन्यू मॉडल बीच टूर्नामेंट में नहीं बदला जा सकता। द्विपक्षीय सीरीज का फैसला सरकारों के हाथ में होता है। केवल ‘हैंडशेक प्रोटोकॉल’ जैसी मांग पर सहमति बन सकती है। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान अंत में खेलने को राजी हो जाएगा। मैच छोड़ने पर पाकिस्तान पर भारी जुर्माना और बैन लग सकता है।
निष्कर्ष
क्रिकेट फैंस को 15 फरवरी का बेसब्री से इंतजार है। फिलहाल आईसीसी इस मामले में मध्यस्थता कर रहा है। आने वाले कुछ दिन क्रिकेट की राजनीति के लिए बहुत अहम हैं। उम्मीद है कि खेल की जीत होगी और मुकाबला समय पर होगा।
