होली 2026 कब है? तारीख, शुभ मुहूर्त और सब कुछ!

Ranjan Tiwari
7 Min Read

अरे ओ सांभा, होली कब है… कब है होली? कितने तारीख को है होली 2026?

जी हाँ, दोस्तों! आ गई है वो घड़ी, जब रंगो का खुमार हम सब पर छा जाने वाला है। होली, मस्ती और धमाल का त्यौहार, जिसके बिना हर भारतीय का दिल अधूरा सा लगता है। लेकिन, अक्सर हम यही सोचते रहते हैं कि आखिर ये होली का त्यौहार कब है? खासकर साल 2026 में, जब हम सब कुछ खास प्लान करना चाहते हैं। तो चलिए, आज हम आपके सारे सवालों का जवाब देंगे।

होली 2026 की सही तारीख क्या है?

सबसे पहले, सबसे ज़रूरी बात! अपनी डायरी में नोट कर लीजिए, साल 2026 में होली का पावन पर्व बुधवार, 4 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। जी हाँ, 4 मार्च को होगी रंगों की बरसात, गुझिया का स्वाद और ढेर सारी मस्ती। तो अब देर किस बात की, शुरू कर दीजिए अपनी तैयारियां!

होलिका दहन कब है?

होली से एक दिन पहले होलिका दहन होता है, जिसे छोटी होली भी कहते हैं। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। साल 2026 में होलिका दहन मंगलवार, 3 मार्च 2026 को होगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त भी जान लीजिए, ताकि आप सही समय पर पूजा-अर्चना कर सकें।

  • होलिका दहन का शुभ मुहूर्त: शाम 06 बजकर 22 मिनट से रात 08 बजकर 50 मिनट तक।
  • अवधि: 2 घंटे 28 मिनट

तो दोस्तों, इस मुहूर्त में अपनी होलिका तैयार रखिएगा, ताकि सभी नकारात्मकता का दहन हो सके और आपके जीवन में खुशियों के रंग भर सकें।

होली का महत्व: क्यों मनाते हैं हम ये त्यौहार?

“ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे!” बिलकुल सही कहा, होली भी दोस्ती और रिश्तों का त्यौहार है। इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं और ऐतिहासिक महत्व जुड़े हुए हैं। होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि यह प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का प्रतीक भी है।

  • प्रहलाद और होलिका की कथा: सबसे प्रसिद्ध कथा भक्त प्रहलाद और उसकी बुआ होलिका की है। भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को हिरण्यकश्यप ने मारने की कई कोशिशें की, लेकिन हर बार प्रहलाद बच गया। होलिका को वरदान था कि उसे अग्नि जला नहीं सकती। वह प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रहलाद बच गया और होलिका जल गई। इसी घटना को याद करते हुए होलिका दहन किया जाता है।
  • राधा-कृष्ण की रासलीला: ब्रज की होली पुरे भारत में प्रशिद्ध है। ब्रज की होली बसंत पंचमी से ही शुरू हो जाती है। ब्रज में होली का विशेष महत्व है, जहाँ इसे राधा-कृष्ण के प्रेम से जोड़ा जाता है। भगवान कृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ रंगों से होली खेली थी। आज भी मथुरा, वृंदावन और बरसाना की होली देखने लायक होती है, जहाँ लट्ठमार होली का आयोजन होता है।
  • कामदेव और भगवान शिव: एक और कथा के अनुसार, भगवान शिव ने जब कामदेव को भस्म कर दिया था, तब कामदेव की पत्नी रति1 ने शिवजी से उन्हें जीवित करने की विनती की। शिवजी ने कामदेव को पुनर्जीवित किया, और इसी खुशी में होली का त्योहार मनाया गया।

होली कैसे मनाएं: कुछ खास बातें

“कितने आदमी थे?” अरे भाई, आदमी कम हों या ज़्यादा, होली तो सब मिलकर ही मनाते हैं! होली पर कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है, ताकि आपका त्यौहार सुरक्षित और joyful रहे।

  • प्राकृतिक रंगों का प्रयोग: रासायनिक रंगों2 से त्वचा को नुकसान हो सकता है। कोशिश करें कि आप गुलाल और प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग करें। इससे आपकी त्वचा भी सुरक्षित रहेगी और पर्यावरण भी।
  • पानी की बचत: होली में पानी का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होता है। कोशिश करें कि आप कम पानी का उपयोग करें और सूखे रंगों से ज़्यादा खेलें। “पानी रे पानी तेरा रंग कैसा?” तो रंगो को बचाएं, पानी को भी!
  • गुझिया और पकवान: होली का त्यौहार बिना गुझिया, मठरी और दही भल्ले के अधूरा है। अपने घरों में स्वादिष्ट पकवान बनाएं और दोस्तों-रिश्तेदारों के साथ उनका आनंद लें।
  • सेफ्टी फर्स्ट: जब आप होली खेल रहे हों, तो ध्यान रखें कि किसी को चोट न लगे। खासकर बच्चों को, उन्हें अपनी निगरानी में खेलने दें।

होली 2026 की तैयारियां: अभी से करें शुरू

“मैं तुम्हें तीन बार मौका देता हूँ…” अरे नहीं भाई, होली की तैयारी के लिए सिर्फ एक मौका मिलता है, और वो है अभी!

  • रंग और गुलाल: अभी से अपने पसंदीदा रंग और गुलाल खरीदना शुरू कर दें। बाज़ार में कई तरह के हर्बल रंग उपलब्ध हैं, उन्हें प्राथमिकता दें।
  • पिचकारी और गुब्बारे: बच्चों के लिए नई-नई पिचकारियां और पानी के गुब्बारे लाएं, ताकि उनकी होली और भी मज़ेदार बन सके।
  • कपड़े और एक्सेसरीज़: होली खेलने के लिए पुराने कपड़े तैयार रखें। अगर आप थीम पार्टी कर रहे हैं, तो उसके अनुसार कपड़े चुनें।
  • मिठाई और नाश्ता: घर में होली के पकवान बनाने की लिस्ट बना लें या फिर अगर आप बाहर से मंगवाने की सोच रहे हैं, तो अभी से ऑर्डर दे दें।

रंगों से भरा हो आपका जीवन

तो दोस्तों, होली 2026 की सारी जानकारी हमने आपको दे दी है। यह त्यौहार सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि खुशियों, प्यार और एकजुटता का प्रतीक है। इस दिन सभी गिले-शिकवे भुलाकर एक दूसरे को गले लगाएं और रंगों के इस महापर्व का दिल खोलकर आनंद लें।

  1. उन्हें कभी-कभी ‘प्रीति’ भी कहा जाता है ↩︎
  2. चंडीगढ़ प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न रंगों में विषैले तत्व होते हैं, जैसे काले में लीड ऑक्‍साइड, हरे में कॉपर सल्‍फेट, और लाल में पारा सल्फाइट। ये स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हैं, विशेषकर त्वचा कैंसर और संपर्क डर्मेटाइटिस का खतरा बढ़ाते हैं। सांस की बीमारी या एलर्जी वाले लोगों को इन रंगों से बचना चाहिए। ↩︎

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