High blood pressure treatment:
नई दिल्ली, एजेंसियां। हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। World Health Organization (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार 2024 में 30 से 79 वर्ष की उम्र के करीब 1.4 बिलियन (140 करोड़) वयस्क हाई बीपी से प्रभावित थे। लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी और आंखों की बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है।अब मरीजों के लिए राहत की खबर है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा विकल्प विकसित किया है, जिससे रोजाना दवा लेने की जरूरत कम हो सकती है। ‘जिलेबेसिरन’ नाम का एक नया इंजेक्शन साल में सिर्फ दो बार लगवाने से ब्लड प्रेशर को लंबे समय तक नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है।
कैसे काम करता है नया इंजेक्शन?
जिलेबेसिरन को Roche और Alnylam Pharmaceuticals ने विकसित किया है। यह स्मॉल इंटरफेरिंग आरएनए (siRNA) तकनीक पर आधारित है, जो लिवर में एंजियोटेंसिनोजेन नामक प्रोटीन के उत्पादन को कम करती है। यही प्रोटीन ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके स्तर को कम कर यह इंजेक्शन लगभग छह महीने तक रक्तचाप को स्थिर रखने में मदद कर सकता है।
शोध में क्या सामने आया?
प्रमुख मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मिड-स्टेज ट्रायल में इस इंजेक्शन से अच्छे परिणाम मिले हैं और फिलहाल यह फेज-3 ट्रायल में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सफल रहता है, तो हाइपरटेंशन के इलाज का तरीका बदल सकता है।हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यह थेरेपी अभी परीक्षण के चरण में है। जब तक इसके दीर्घकालिक प्रभाव पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाते, तब तक नियमित दवाओं और जीवनशैली में सुधार जैसे नमक कम करना, नियमित व्यायाम और संतुलित आहार को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
यह नई खोज भविष्य में हाई बीपी मरीजों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है, लेकिन फिलहाल विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही उपचार जारी रखना जरूरी है।







