Hidma killed in encounter:
रायपुर, एजेंसियां। छत्तीसगढ़-बस्तर के कुख्यात नक्सली कमांडर माडवी हिडमा को आंध्र प्रदेश के मारेदुमिल्ली जंगल में सुरक्षाबलों ने उसकी पत्नी राजे और 4 साथियों के साथ मार गिराया। दो दशकों से दंडकारण्य में नक्सल हिंसा का चेहरा रहा हिडमा नक्सलियों के सबसे खतरनाक ऑपरेशनों का मास्टरमाइंड था। उसके खात्मे को सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सलवाद की ‘ताबूत में आखिरी कील’ बताया है।
कौन था हिडमा?
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला हिडमा 1990 के दशक के अंत में नक्सली संगठन में शामिल हुआ था। साधारण कैडर से वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के बटालियन नंबर-1 का कमांडर बना और 2024 में CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमिटी का सबसे युवा सदस्य बना। एके-47 लेकर जंगलों में घूमने वाला हिडमा चार परतों वाली सुरक्षा के कारण वर्षों तक पकड़ा नहीं जा सका। NIA ने उस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम रखा था। हिडमा ने ताड़मेटला (2010), झीरम घाटी हमला (2013), बुरकापाल (2017) और कई बड़े हमलों की योजना बनाई, जिनमें सैकड़ों जवान और राजनीतिक नेता मारे गए। 2025 तक सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से उसका नेटवर्क कमजोर हुआ और वह सीमावर्ती जंगलों में छिपने को मजबूर हो गया।
मंगलवार सुबह सुरक्षाबलों ने सटीक इंटेलिजेंस के आधार पर उसे घेरकर मार गिराया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार हिडमा का मारा जाना दंडकारण्य में माओवाद के पतन का संकेत है। उसकी मौत से PLGA की सबसे मजबूत यूनिट कमजोर होगी और युवाओं में नक्सल रुखसारी का मनोबल टूट सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे नक्सल संगठन में बिखराव और तेज होगा।







