Headphones vs earbuds:
नई दिल्ली, एजेंसियां। आज के डिजिटल दौर में ऑडियो डिवाइस सिर्फ म्यूजिक सुनने तक सीमित नहीं हैं। ऑनलाइन क्लास, ऑफिस मीटिंग, गेमिंग और जिम वर्कआउट में भी इनकी जरूरत पड़ती है। लेकिन खरीदारी के समय अक्सर लोग हेडफोन, ईयरफोन और ईयरबड्स के बीच के तकनीकी अंतर को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे कानों में दर्द, खराब साउंड क्वालिटी और असुविधा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आपकी जरूरत, बजट और उपयोग के तरीके के हिसाब से ही सही विकल्प चुनना जरूरी है।
हेडफोन: गहरा और पावरफुल साउंड
हेडफोन कानों को पूरी तरह ढक लेते हैं, जिससे बाहर का शोर कम हो जाता है और सुनने का अनुभव इमर्सिव बनता है। बड़े ड्राइवर्स की वजह से बेस और ऑडियो क्लियरिटी बेहतर होती है। प्रीमियम मॉडल्स में एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन (ANC) फीचर भी मिलता है, जो बाहरी शोर को ब्लॉक कर देता है। वायरलेस हेडफोन की बैटरी लाइफ आमतौर पर 20-40 घंटे तक होती है। हेडफोन म्यूजिक प्रोडक्शन, गेमिंग और प्रोफेशनल यूज के लिए उपयुक्त हैं, लेकिन ये बड़े और महंगे हो सकते हैं।
ईयरफोन: बजट में आसान विकल्प
ईयरफोन हल्के और किफायती होते हैं, और सीधे कान के अंदर फिट होते हैं। कॉलिंग और सामान्य म्यूजिक सुनने के लिए ये पर्याप्त हैं। साउंड क्वालिटी ठीक-ठाक होती है, लेकिन गहरा बेस या प्रीमियम अनुभव सीमित होता है। वायरलेस वर्जन उपलब्ध हैं, लेकिन बैटरी बैकअप कम होता है। कम खर्च में रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए ईयरफोन एक प्रैक्टिकल और बजट-फ्रेंडली विकल्प हैं।
ईयरबड्स: वायरलेस और पोर्टेबल
ईयरबड्स पूरी तरह वायरलेस होते हैं और चार्जिंग केस के साथ आते हैं। एक बार चार्ज करने पर ये आमतौर पर 4-8 घंटे तक चलते हैं, और केस के जरिए कई बार दोबारा चार्ज किए जा सकते हैं। हल्के और पोर्टेबल होने के कारण ये ऑफिस, ट्रैवल और जिम के लिए लोकप्रिय हैं। नए मॉडल्स में बेहतर ड्राइवर और नॉइज कंट्रोल फीचर भी मिलते हैं। हालांकि साउंड की गहराई हेडफोन जितनी नहीं होती, फिर भी रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए संतुलित विकल्प हैं।
खरीदते समय ध्यान देने योग्य बातें
- साउंड और बेस: सिनेमैटिक अनुभव चाहिए तो हेडफोन।
- बजट और पोर्टेबिलिटी: साधारण उपयोग के लिए ईयरफोन। वायरलेस सुविधा और हल्कापन चाहिए तो ईयरबड्स।
- बैटरी और फीचर: वायरलेस बैकअप, ANC और आराम का संतुलन देखें।








