Delhi High Court
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली हाई कोर्ट में एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी घटाने का मामला जोर पकड़ रहा है। अदालत ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि दिल्ली-एनसीआर में गंभीर प्रदूषण के हालात में एयर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत जीएसटी को घटाकर 5 प्रतिशत क्यों नहीं किया जा सकता। इस मामले में एडवोकेट कपिल मदान की याचिका के मुताबिक एयर प्यूरीफायर को ‘लग्जरी आइटम’ की बजाय ‘मेडिकल डिवाइस’ के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए, ताकि इसकी कीमत आम आदमी की पहुंच में आए।
केंद्र सरकार की दलील
केंद्र सरकार ने अदालत में दलील दी कि किसी एक उत्पाद पर रातों-रात जीएसटी घटाना आसान नहीं है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण बताए गए। पहला, अगर प्रक्रिया का पालन किए बिना टैक्स घटाया गया तो भविष्य में अन्य उत्पादों पर भी इसी तरह की मांगें आ सकती हैं, जिससे पूरा टैक्स सिस्टम प्रभावित होगा।
दूसरा, जीएसटी दरों में बदलाव का फैसला केवल जीएसटी काउंसिल के पास है, जिसमें सभी 30 राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और केंद्रीय वित्त मंत्री शामिल होते हैं। तीसरा, हाई कोर्ट की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक आयोजित करने की सुझाव को भी केंद्र ने नियमों के तहत असंभव बताया, क्योंकि काउंसिल की चर्चा और वोटिंग फिजिकल तौर पर होती है।
हाई कोर्ट ने जताई चिंता
हाई कोर्ट ने सरकार की दलीलों को सुनते हुए दिल्ली और आसपास के इलाकों की खराब हवा पर चिंता जताई और कहा कि एयर प्यूरीफायर की कीमत आम आदमी की पहुंच से बाहर है, इसलिए इसे उचित स्तर पर लाने के लिए कोई रास्ता निकाला जाना चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार को 10 दिन में विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई 9 जनवरी 2026 को होगी। इस दौरान सरकार को बताना होगा कि जीएसटी काउंसिल की बैठक कब हो सकती है और क्या एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी को लेकर कोई अंतरिम राहत दी जा सकती है।

