100 करोड़ की लागत से बंगाल में बनेगा भव्य राम मंदिर, ‘बंगाली राम’ थीम होगी पहचान

Anjali Kumari
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Ram Temple in Bangal

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के शांतिपुर में कृतिबास ओझा की रामायण से प्रेरित ‘बंगाली राम’ थीम पर एक भव्य राम मंदिर के निर्माण की तैयारी शुरू हो गई है। यह मंदिर करीब 15 बीघा भूमि पर बनेगा और इसकी अनुमानित लागत 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है। परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

कृतिबास ओझा की परंपरा पर आधारित मंदिर

यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं होगा, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक सांस्कृतिक और हेरिटेज केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। 15वीं शताब्दी में संस्कृत रामायण का बंगला अनुवाद ‘श्रीराम पंचाली’ लिखने वाले कृतिबास ओझा की परंपरा को केंद्र में रखते हुए ‘बंगाली राम’ की अवधारणा को मंदिर की मूल थीम बनाया गया है।

ट्रस्ट और नेतृत्व

इस परियोजना का निर्माण श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट कर रहा है, जो एक पंजीकृत धार्मिक एवं जनकल्याणकारी संस्था है। ट्रस्ट के अध्यक्ष अरिंदम भट्टाचार्य हैं, जो शांतिपुर के पूर्व तृणमूल विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में भाजपा से जुड़े हैं। ट्रस्ट 2017 से इस परियोजना पर काम कर रहा है। हाल ही में मंदिर भूमि का अंतिम सर्वेक्षण पूरा किया गया, जिसे औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।

जमीन दान और संरक्षक

मंदिर के लिए जमीन स्थानीय निवासियों लितन भट्टाचार्य और पूजा बनर्जी द्वारा दान की गई है। मंदिर के आधिकारिक संरक्षक के रूप में नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े वैदिक विद्वान अर्जुन दासतुला को नियुक्त किया गया है।

क्या-क्या होगा परिसर में

एक सांस्कृतिक केंद्र, शोध केंद्र, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने की भी योजना है।

राजनीति से इनकार, संस्कृति पर जोर

मंदिर निर्माण ऐसे समय में चर्चा में है, जब राज्य में मंदिर–मस्जिद की राजनीति तेज है। हालांकि ट्रस्ट का कहना है कि यह परियोजना पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक है, न कि चुनावी। ट्रस्ट अध्यक्ष अरिंदम भट्टाचार्य ने कहा कि यह शांतिपुर की भक्ति आंदोलन की विरासत और कृतिबास ओझा की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

स्थानीय समर्थन

स्थानीय लोगों का कहना है कि शांतिपुर चैतन्य महाप्रभु, भक्ति आंदोलन और कीर्तन संस्कृति का ऐतिहासिक केंद्र रहा है। ऐसे में ‘बंगाली राम’ पर आधारित यह मंदिर क्षेत्र को नया धार्मिक और सांस्कृतिक आयाम दे सकता है।

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