Anupriya Patel
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्भवती महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित मातृत्व को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार एक प्रभावी योजना चला रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संसद में बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत हर गर्भवती महिला का कम से कम एक बार विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। यह जांच हर महीने की 9 तारीख को आयोजित विशेष शिविरों के माध्यम से होती है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा नियमित जांच
अनुप्रिया पटेल ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं की समय रहते पहचान करना है। अभियान के तहत स्त्री रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन और अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर गर्भवती महिलाओं की जांच करते हैं, ताकि मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। खासतौर पर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
सरकारी के साथ निजी डॉक्टर भी शामिल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत देश के सभी राज्यों में लागू है। वर्तमान में देशभर में 23 हजार से अधिक सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में यह सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा बड़ी संख्या में निजी डॉक्टरों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है, जिससे कामकाजी और प्रवासी महिलाएं भी आसानी से इसका लाभ उठा सकें।
डिजिटल ट्रैकिंग और आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका
हाई रिस्क गर्भावस्था की निगरानी आरसीएच पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप से की जाती है। गांवों और शहरी क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी होती है कि वे यह सुनिश्चित करें कि हर गर्भवती महिला का कम से कम एक बार विशेषज्ञ डॉक्टर से चेकअप जरूर हो।
सुरक्षित मातृत्व की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि समय पर जांच और इलाज से मातृ मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान इसी लक्ष्य के साथ देशभर में गर्भवती महिलाओं के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद स्वास्थ्य सुरक्षा कवच बनकर उभरा है।








