e-commerce companies: सरकार ई-कॉमर्स कंपनियों पर सख्त, कैश ऑन डिलीवरी शुल्क की जांच शुरू

Anjali Kumari
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नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार अब ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि अमेज़न, फ्लिपकार्ट और फर्स्टक्राई जैसी कंपनियां “कैश ऑन डिलीवरी” (COD) पर अतिरिक्त शुल्क वसूल रही हैं जो आमतौर पर ₹7 से ₹10 तक लिया जा रहा है।
इस मामले में उपभोक्ता मामले मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि सरकार ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने इसे एक “डार्क पैटर्न” बताया, जो ग्राहकों को गुमराह करने और उनके साथ शोषण का उदाहरण है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसी प्रथाओं को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शिकायतों में कहा गया

शिकायतों में कहा गया है कि कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ग्राहकों को प्रीपेड भुगतान के लिए मजबूर करते हैं। साथ ही यदि कोई ग्राहक प्रीपेड ऑर्डर रद्द करता है, तो रिफंड में अनुचित देरी की जाती है। सरकार अब इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके।

प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट पर कहा

प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि विभाग को कई शिकायतें मिली हैं और अब इन कंपनियों की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा “भारत के बढ़ते ई-कॉमर्स क्षेत्र में पारदर्शिता और निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करना जरूरी है। उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” इस बीच मंत्रालय ने ग्राहकों से अपील की है कि अगर उन्हें किसी कंपनी द्वारा सीओडी पर अतिरिक्त चार्ज लिया जा रहा है, तो वे अपनी शिकायतें नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज कराएं।

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