Ghooskhor Pandat controversy:
मुंबई, एजेंसियां। मनोज बाजपेयी की नई फिल्म ‘Ghooskhor Pandat’ रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। फिल्म का टाइटल सोशल मीडिया और जनता के कुछ वर्गों को आपत्तिजनक लगा, क्योंकि इसमें ‘पंडित’ शब्द के साथ ‘घूसखोर’ जोड़ा गया है। इसके कारण दिल्ली हाई कोर्ट में रिलीज पर रोक लगाने की याचिका दायर की गई, वहीं लखनऊ में मेकर्स के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फिल्म का टाइटल और कंटेंट धार्मिक और जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है और सार्वजनिक सद्भाव को खतरा पैदा कर सकता है।
मेकर्स ने सफाई दी
विवाद बढ़ता देख फिल्म के मेकर्स ने सफाई दी, लेकिन अब लीड एक्टर मनोज बाजपेयी ने भी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए लंबा नोट लिखकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी भी समुदाय या जाति के खिलाफ बयान देना नहीं था। मनोज ने लिखा, “मैं लोगों की भावनाओं और चिंताओं का सम्मान करता हूं। फिल्म में मेरा किरदार एक कमजोर इंसान और उसकी आत्म-पहचान की यात्रा को दिखाता है। इस कहानी का मकसद किसी भी समुदाय को निशाना बनाना नहीं है।” उन्होंने यह भी बताया कि नीरज पांडे के साथ काम करते समय हमेशा गंभीरता और सावधानी बरती गई।
मनोज ने क्या कहा
मनोज ने कहा कि फिल्म बनाने वालों ने दर्शकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रमोशनल मटीरियल हटाने का फैसला किया है। इससे यह जाहिर होता है कि उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया गया है।इससे पहले डायरेक्टर नीरज पांडे ने भी इंस्टाग्राम पर सफाई दी थी। उन्होंने कहा कि फिल्म एक काल्पनिक कॉप ड्रामा है और टाइटल का इस्तेमाल सिर्फ काल्पनिक किरदार के लिए किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कहानी किसी जाति, धर्म या समुदाय पर टिप्पणी नहीं करती। उन्होंने सभी प्रमोशनल मटीरियल हटाने का निर्णय दर्शकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए लिया और फिल्म को पूरी तरह देखने के बाद ही समझने की अपील की।
इस विवाद के बीच, मेकर्स और एक्टर दोनों ने साफ कर दिया है कि फिल्म का उद्देश्य केवल दर्शकों का मनोरंजन है, न कि किसी की भावनाओं को आहत करना।

















