Ganga-Yamuna water level:
लखनऊ, एजेंसियां। प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और अब दोनों नदियों ने खतरे के निशान 84.734 मीटर को पार कर लिया है। गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 86.03 मीटर और यमुना का नैनी में 86.04 मीटर तक पहुंच चुका है, जिससे 1978 का जलस्तर रिकॉर्ड टूटने का खतरा मंडराने लगा है।
स्थिति गंभीर
शहर के कछार इलाके और अब कई पॉश क्षेत्र भी बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा है। जलस्तर में तेजी से वृद्धि के कारण बाढ़ प्रभावितों की संख्या बढ़ रही है।
राहत शिविरों की स्थिति
प्रयागराज के विभिन्न इलाकों में बाढ़ प्रभावितों के लिए कुल 13 राहत शिविर खोले गए हैं, जहां अब तक 7,436 लोग शरण लिए हुए हैं। हालांकि, इन शिविरों में भोजन और नाश्ते की व्यवस्था कमजोर होने की शिकायतें आ रही हैं। प्रशासन ने इस पर कार्रवाई करते हुए एजेंसियों को नोटिस भी जारी किया है।
राहत कार्यों में सक्रियता:
एनडीआरएफ और सीडीआरएफ की टीमें बचाव कार्यों में लगी हैं। प्रशासन ने 30 नावें तैनात की हैं ताकि बाढ़ से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। अतिरिक्त नावें भी तैनात की जाएंगी।
बिजली और अन्य सुविधाओं पर प्रभाव
बाढ़ के कारण निचले इलाकों में 11 ट्रांसफॉर्मर बंद कर दिए गए हैं, जिससे बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। ऊंचे मकानों में दूसरे ट्रांसफॉर्मर से बिजली आपूर्ति जारी है।
प्रभावित क्षेत्र
सदर तहसील, फूलपुर, करछना, सोरांव, मेजा, बारा, हंडिया सहित कई गांव और मोहल्ले बाढ़ से प्रभावित हैं। राजापुर और गंगानगर क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जहां मकानों में एक तल तक पानी भर चुका है।
आगे की संभावना
जलस्तर में अभी और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन अलर्ट मोड पर है और लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।
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