Border dispute:
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच अब दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया फिर से तेज़ हो रही है। सितंबर 2025 में चीन के तियानजिन शहर में होने वाले SCO (Shanghai Cooperation Organisation) समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आमने-सामने मुलाकात की संभावना है।
मोदी-जिनपिंग बैठक के संभावित एजेंडे
इस बहुप्रतीक्षित मीटिंग में LAC पर स्थायित्व, सीमा व्यापार की बहाली, कैलाश मानसरोवर यात्रा का विस्तार, सीधी उड़ानों की बहाली, वीजा नीति में राहत और जल संसाधनों के साझाकरण जैसे कई अहम मुद्दे शामिल होंगे।
चीन ने दिए सकारात्मक संकेत
बैठक से पहले ही चीन ने भारत के प्रति नरम रुख अपनाते हुए तीन बड़े क्षेत्रों में पाबंदियां हटाने की घोषणा की है:
फर्टिलाइज़र निर्यात – इससे भारतीय किसानों को सस्ती और समय पर खाद मिलेगी।
रेयर अर्थ मटेरियल – इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा इंडस्ट्री को बूस्ट मिलेगा।
टनल बोरिंग मशीनें – बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ेगी।
रणनीतिक समीकरण और वैश्विक नजरिया
डोकलाम और गलवान जैसी घटनाओं ने भारत-चीन के रिश्तों को खटास में डाल दिया था। अब जब अमेरिका और भारत के व्यापार संबंधों में अस्थिरता देखी जा रही है, तब चीन से बेहतर संबंधों की कोशिश भारत के लिए सामरिक दृष्टि से अहम हो जाती है।
क्या नया अध्याय लिखा जाएगा?
मोदी-जिनपिंग की यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं होगी, बल्कि भारत-चीन के भविष्य के रिश्तों का “टेस्ट केस” मानी जा रही है। यदि यह बैठक सफल होती है, तो इसका सीधा असर किसान, इंडस्ट्री और आम लोगों तक पहुंचेगा।
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