Female sexual harassment case: महिला पहलवान यौन शोषण केस: दलीलें टालने पर हाईकोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को लगाई फटकार

3 Min Read

Female sexual harassment case:

नई दिल्ली, एजेंसियां। महिला पहलवानों के यौन शोषण से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह की याचिका पर दलीलें पेश न किए जाने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि इस मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर कोई रोक नहीं है और ट्रायल अपने तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि यह याचिका वर्ष 2024 में दाखिल की गई थी, लेकिन अब तक याचिकाकर्ता की ओर से ठोस दलीलें नहीं रखी जा रही हैं। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि बिना पर्याप्त कारण के लगातार समय मांगना स्वीकार्य नहीं है। अगली सुनवाई 21 अप्रैल 2026 को तय की गई है।

सुनवाई के दौरान

सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह के वकील ने दलीलें रखने के लिए और समय की मांग की, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। इससे पहले 29 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट ने उन्हें कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने तब कहा था कि ट्रायल शुरू होने के बाद आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देना, परोक्ष रूप से पूरे मामले को खत्म करने की कोशिश है।

किस पर लगे कौनसे धारा?

यह मामला फिलहाल राऊज एवेन्यू कोर्ट में विचाराधीन है, जहां 26 जुलाई 2024 से ट्रायल चल रहा है। 10 मई 2024 को ट्रायल कोर्ट ने छह में से पांच महिला पहलवानों की शिकायतों को प्रथम दृष्टया सही मानते हुए बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 354ए और 506 के तहत आरोप तय किए थे। एक शिकायत के मामले में उन्हें बरी किया गया था।मामले में सह-आरोपी और कुश्ती संघ के पूर्व सचिव विनोद तोमर के खिलाफ भी धारा 506 के तहत आरोप तय किए गए हैं। 7 जुलाई 2023 को दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर कोर्ट ने संज्ञान लिया था। हाईकोर्ट के ताजा रुख से साफ है कि इस संवेदनशील मामले में न्यायिक प्रक्रिया में किसी तरह की देरी को अदालत स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

Share This Article
Exit mobile version