FASTag annual pass
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फास्टैग का ₹3000 वाला वार्षिक टोल पास केवल निजी (नॉन-कमर्शियल) वाहनों के लिए ही लागू है और इसे कैब-टैक्सी या अन्य कमर्शियल वाहनों तक बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।दरअसल, सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने संसद में सवाल उठाया था कि क्या टैक्सी और कैब एग्रीगेटर वाहनों के लिए भी निजी वाहनों की तरह सालाना टोल पास की सुविधा शुरू करने की योजना है। इसके जवाब में सरकार ने कहा कि ऐसी कोई योजना विचाराधीन नहीं है।
सरकार ने बताया
सरकार ने बताया कि पिछले साल शुरू की गई इस योजना के तहत ₹3000 में सालाना पास मिलता है, जिससे वाहन मालिक 200 बार तक टोल प्लाजा पार कर सकते हैं। यह सुविधा खास तौर पर निजी वाहनों के नियमित उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी।
हालांकि, सरकार ने यह भी कहा कि जिले में पंजीकृत कमर्शियल वाहनों को कुछ स्थानीय छूट और राष्ट्रीय राजमार्गों के नियमित उपयोगकर्ताओं के लिए मासिक पास की सुविधा पहले से उपलब्ध है।एक राज्य से दूसरे राज्य में चलने वाली टैक्सियों पर लगने वाले वाहन और एंट्री टैक्स के मुद्दे पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन करों को तय करने का अधिकार राज्यों के पास है, इसलिए केंद्र सरकार इन्हें एक समान नहीं कर सकती।
टैक्सी ड्राइवरों की सुरक्षा और काम के घंटों
टैक्सी ड्राइवरों की सुरक्षा और काम के घंटों को लेकर सरकार ने बताया कि मोटर व्हीकल्स एक्ट और मोटर ट्रांसपोर्ट वर्कर्स एक्ट के तहत ड्राइवरों के लिए रोजाना 8 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे काम की सीमा निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एक समिति भी बनाई गई है, जिसने ड्राइविंग घंटों की निगरानी और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की सिफारिश की है।


















