Electricity privatization:
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों ने प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किया। बारिश की परवाह किए बिना, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्यों ने उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के विरोध में आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने संकल्प लिया कि जब तक निजीकरण का प्रस्ताव रद्द नहीं किया जाएगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
समिति के पदाधिकारियों का आरोप
समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि निजीकरण के विरोध में आवाज उठाने पर कर्मियों के खिलाफ उत्पीड़न किया जा रहा है, जिसमें 55 साल की उम्र को आधार बनाकर संविदा कर्मियों को हटाना, कर्मचारियों के तबादले, और वेतन-मानदेय का भुगतान न करना शामिल है।
प्रदर्शन के दौरान, कर्मियों ने यह भी आरोप लगाया कि निजीकरण न कर पाने के कारण बिजली विभाग का प्रबंधन निजी घरानों के साथ मिलीभगत में है और इसी वजह से कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
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