Weather department warning: ला नीना के असर से इस बार पड़ सकती है कड़ाके की ठंड

Juli Gupta
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Weather department’s warning:

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी और मानसून की मार झेल चुके लोगों के लिए मौसम विभाग ने एक और चेतावनी जारी की है। इस बार सर्दियां सामान्य से ज्यादा ठंडी पड़ सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि साल के अंत तक ला नीना (La Niña) की स्थिति बनने की संभावना है, जिसके चलते भारत में ठंडी लहरें तेज और लंबी अवधि तक चल सकती हैं।

क्या है ला नीना?

ला नीना प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र सतह के तापमान के सामान्य से ठंडा होने की स्थिति है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पैटर्न पर पड़ता है। भारत में यह अक्सर ठंडी और लंबी सर्दियों का कारण बनता है।

मौसम विभाग का अनुमान

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपने बुलेटिन में कहा कि अभी परिस्थितियां सामान्य हैं, लेकिन अक्टूबर से दिसंबर के बीच ला नीना विकसित होने की 50% से अधिक संभावना है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “ला नीना के दौरान भारत की सर्दियां सामान्य से ठंडी होती हैं। जलवायु परिवर्तन का असर गर्माहट ला सकता है, लेकिन इससे ठंडी लहरों की तीव्रता और अवधि पर बहुत फर्क नहीं पड़ेगा।”

विशेषज्ञों की राय

स्काइमेट वेदर के अध्यक्ष जीपी शर्मा ने बताया कि प्रशांत महासागर का तापमान पहले से ही सामान्य से ठंडा है। यदि यह लगातार तीन महीनों तक -0.5°C से नीचे बना रहा, तो इसे आधिकारिक तौर पर ला नीना घोषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार भारत में अधिक बर्फबारी और कड़ाके की ठंड की संभावना है।

शोध क्या कहते हैं?

आईआईएसईआर मोहाली और ब्राजील के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस रिसर्च के अध्ययन में पाया गया कि ला नीना के वर्षों में उत्तर भारत में ठंडी हवाएं ज्यादा देर तक बनी रहती हैं। इससे हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में तीखी ठंड पड़ सकती है।

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