Chaitanyanand Saraswati gets relief:
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को फर्जी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट जालसाजी मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है, लेकिन वह अभी भी तिहाड़ जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। इसकी वजह उनके खिलाफ दर्ज अन्य गंभीर मामले हैं, जिनमें छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप शामिल हैं।
कोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल
पटियाला हाउस कोर्ट के फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अनिमेष कुमार ने 20 जनवरी को दिए आदेश में दिल्ली पुलिस की जांच पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि चार्जशीट लापरवाही से दाखिल की गई है और आरोपी के खिलाफ ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि नकली नंबर प्लेट उसी ने बनवाई थी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कार के ड्राइवर से ठीक से पूछताछ नहीं की गई और नकली नंबर प्लेट के स्रोत का पता लगाने की कोशिश भी नहीं हुई। अदालत के अनुसार, जब जांच पूरी हो चुकी है और आरोपों में अधिकतम सजा सात साल तक की है, तो आरोपी को अनिश्चित समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
छेड़छाड़ के आरोप बने जेल में रहने की वजह
हालांकि जालसाजी मामले में जमानत मिलने के बावजूद स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को जेल में ही रहना होगा, क्योंकि उनके खिलाफ छात्राओं से छेड़छाड़ का मामला लंबित है। अगस्त 2025 में दर्ज शिकायत में 17 छात्राओं ने आरोप लगाया था कि उन्होंने उन्हें अश्लील व्हाट्सएप संदेश भेजे और अनुचित व्यवहार किया।
कई मामलों में चल रही सुनवाई
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और आपराधिक धमकी जैसी धाराओं में केस दर्ज किया था। इसके अलावा धोखाधड़ी, ट्रस्ट से पैसे निकालने और डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट जालसाजी से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई चल रही है।
फिलहाल अदालत में इन सभी मामलों की सुनवाई जारी है और अंतिम फैसला आना बाकी है।







