Digital Personal Data Protection Act 2025: सरकार ने लागू किया डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन 2025, जानें यूजर्स के लिए फायदे और नियम

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Digital Personal Data Protection Act 2025:

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियम 2025 को लागू कर दिया है, जिसका उद्देश्य यूजर्स के निजी डेटा को सुरक्षित करना और उन्हें अपने डेटा पर अधिक नियंत्रण देना है। यह नियम इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रसारण मंत्रालय की अधिसूचना के तहत आधिकारिक रूप से प्रभाव में आ गया है। DPDP नियम कंपनियों और संस्थाओं को यह स्पष्ट रूप से बताने के लिए बाध्य करता है कि वे यूजर्स का डेटा कैसे इकट्ठा, संसाधित और संरक्षित करती हैं।

कौन है डेटा प्रिंसिपल और डेटा फिड्यूशियरी:

नए नियम में डेटा प्रिंसिपल वह व्यक्ति है, जिसका निजी डेटा इकट्ठा किया जाता है। डेटा फिड्यूशियरी वह कंपनी या संगठन है, जो यूजर्स के डेटा को मैनेज और संसाधित करता है। नियम का उद्देश्य डेटा कलेक्शन और मैनेजमेंट को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।

यूजर्स का डेटा पर ज्यादा कंट्रोल:

DPDP 2025 यूजर्स को उनके डेटा पर अधिक अधिकार देता है। कंपनियों को यह बताना होगा कि कौन सा डेटा इकट्ठा किया जा रहा है और उसका उपयोग कैसे किया जाएगा। इसके साथ ही, डेटा फिड्यूशियरी को डेटा उल्लंघन की स्थिति में प्रभावित यूजर्स को 72 घंटे के भीतर सूचित करना अनिवार्य होगा। डेटा की सुरक्षा के लिए एनक्रिप्शन, मास्किंग, ऑब्फस्केशन या टोकनाइजेशन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

नाबालिगों के डेटा पर विशेष प्रावधान:

18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स के डेटा को संसाधित करने के लिए माता-पिता या गार्जियन की सहमति अनिवार्य होगी। कंपनियों को सहमति देने वाले व्यक्ति की पहचान और उम्र सत्यापित करनी होगी। इसके लिए वेरिफाइड वर्चुअल टोकन का उपयोग किया जाएगा।

धारा अनुसार लागू होने का समय:

DPDP नियम के कुछ प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हैं, जबकि अन्य धारा अनुसार क्रमिक रूप से 1 साल और 18 महीने में लागू होंगे। इसका मतलब है कि यह नियम पूरी तरह मई 2027 तक लागू हो जाएगा।

सरकारी उद्देश्य:

इस नियम का मुख्य उद्देश्य डिजिटल स्पेस में यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करना, डेटा की पारदर्शिता सुनिश्चित करना और कंपनियों को जवाबदेह बनाना है। DPDP 2025 से भारतीय यूजर्स को उनके निजी डेटा पर नियंत्रण मिलेगा और उनका डिजिटल अनुभव सुरक्षित होगा।इस नियम के लागू होने से अब यूजर्स यह जान पाएंगे कि उनकी व्यक्तिगत जानकारी कैसे उपयोग की जा रही है और कौन सी कंपनियां इसे प्रबंधित कर रही हैं, जिससे डिजिटल सुरक्षा और भरोसा बढ़ेगा।’

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