Delhi Blast:
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के लाल किले के बाहर 10 नवंबर को हुए कार बम धमाके की जांच अब बड़े आतंकी मॉड्यूल की ओर इशारा कर रही है। इस धमाके में 13 लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे। अब दिल्ली पुलिस ने साजिश के नए पहलुओं को देखते हुए दूसरी FIR दर्ज कर जांच को और व्यापक कर दिया है।
कई एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई:
सरकारी सूत्रों ने बताया कि मामले में वित्तीय लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए CBI और ED को भी शामिल किया गया है। वहीं NIA, दिल्ली पुलिस, हरियाणा पुलिस, यूपी ATS और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर कई राज्यों में छापेमारी की है। कार्रवाई के दौरान कुछ संदिग्ध डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया और चार कारें भी जब्त की गईं।
डॉक्टरों का आतंकी मॉड्यूल:
जांच में सामने आया है कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े इस मॉड्यूल में शुरुआती दौर में 8 डॉक्टर शामिल थे, जो दिल्ली–NCR के 32 स्थानों पर 6 दिसंबर को बड़े आतंकी हमले की योजना बना रहे थे। जब्त की गई कारों—स्विफ्ट डिजायर, i20, इकोस्पोर्ट और ब्रेजा—का इस्तेमाल इसी मॉड्यूल द्वारा किया जा रहा था। स्विफ्ट डिजायर डॉक्टर शाहीन के नाम पर दर्ज है, जिसका इस्तेमाल डॉक्टर मुजम्मिल कर रहा था; इसी कार से हथियार बरामद हुए।
फंडिंग और विस्फोटक सामग्री:
मुख्य आरोपियों डॉक्टर मुजम्मिल, डॉक्टर आदिल, डॉक्टर उमर और डॉक्टर शाहीन ने मिलकर करीब 20 लाख रुपये जुटाए थे, जिनमें से 3 लाख रुपये IED बनाने में खर्च हुए। गुरुग्राम और नूंह से 20 क्विंटल से अधिक NPK खाद खरीदी गई थी। जांच में यह भी पता चला कि डॉक्टर उमर और डॉक्टर मुजम्मिल के बीच पैसों को लेकर विवाद हुआ था।
सीक्रेट चैट ग्रुप और बरामद दस्तावेज:
डॉक्टर उमर ने सिग्नल ऐप पर एक सीक्रेट ग्रुप बनाकर आतंकी योजना का समन्वय किया था। डॉक्टर आदिल की गिरफ्तारी के बाद मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ। अल-फलाह यूनिवर्सिटी से बरामद दो डायरी और नोटबुक में कई कोड वर्ड, तारीखें और ‘ऑपरेशन’ शब्द बार-बार दर्ज मिला।
नया सबूत और बढ़ती गंभीरता:
धमाके स्थल से 500 मीटर दूर एक बाजार की छत पर एक कटा हुआ हाथ मिलने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। वहीं गुरुवार को एक और घायल, बिलाल, की मौत हो गई। फिलहाल सभी जांच एजेंसियां इसे बड़ी आतंकी साजिश मानकर तेज़ी से कार्रवाई कर रही हैं।








