AIIMS Bhopal: CPR से बच सकती है ज़िंदगी, एम्स भोपाल में मॉक ड्रिल के जरिए दी गई ट्रेनिंग

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AIIMS Bhopal:

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में तेजी से बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों के बीच एम्स भोपाल में सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) को लेकर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मकसद था लोगों को यह सिखाना कि हार्ट अटैक की स्थिति में सीपीआर देकर कैसे किसी की जान बचाई जा सकती है।

क्या है सीपीआर?

सीपीआर एक आपातकालीन जीवनरक्षक तकनीक है जो दिल और सांस रुकने की स्थिति में दी जाती है। इससे रोगी के शरीर में रक्त का प्रवाह चालू रहता है जिससे दिल और दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचती रहती है।

डॉ. संजय मंडलोई ने बताया कि हार्ट अटैक के तुरंत बाद का ‘गोल्डन टाइम’ (30 मिनट) बेहद अहम होता है। अगर इस समय में सही तरीके से सीपीआर दे दिया जाए, तो 60-70% मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।

सीपीआर देने का सही तरीका

रोगी की नाक के पास कान लगाकर देखें कि वह सांस ले रहा है या नहीं।
सांस न लेने पर तुरंत सीपीआर शुरू करें।
मरीज को सीधा लिटाएं, कपड़े और बेल्ट ढीले करें।
छाती के बीचोंबीच अपने दोनों हाथ रखें, कोहनी सीधी रखें।
हर मिनट में 100-120 बार छाती पर दबाव बनाएं।
30 बार दबाने के बाद एक बार मुंह से सांस दें।
यह प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक मदद न पहुंचे या सांस न लौट आए।

जरूरी सावधानी

हमेशा सीपीआर देने से पहले रोगी की सांस और नाड़ी चेक करें।
यदि संभव हो, रोगी को तुरंत एक डिस्प्रिन की गोली दें।
इलाज के लिए जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएं।
डॉक्टरों ने अपील की है कि हर व्यक्ति को सीपीआर का बेसिक ज्ञान होना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में किसी की जान बचाई जा सके।

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