CJI Surya Kant
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में एक वकील की पिटाई का मामला सामने आया है। उस वकील ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष आरोप लगाया कि कोर्ट रूम के भीतर, जज की मौजूदगी में, उस पर और एक आरोपी पर पर गुंडों ने हमला किया।
मामला पिछले शनिवार का बताया जा रहा है। वकील के अनुसार वह एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज हरजीत सिंह पाल की अदालत में एक आरोपी की ओर से पेश हो रहा था। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील के साथ कई अन्य लोग अचानक अदालत कक्ष में घुस आए और देखते ही देखते हिंसा शुरू हो गई।
जज के सामने ही मारपीट, दरवाजा अंदर से बंद किया
वकील ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने कोर्ट रूम का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और खुलेआम मारपीट की। यह पूरी घटना अदालत के भीतर, जज की मौजूदगी में हुई, जो न्यायपालिका की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इस घटना को लेकर जब वकील ने सुप्रीम कोर्ट में मौखिक उल्लेख किया, तो CJI सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल किया कि लिखित शिकायत के बजाय सीधे उनके समक्ष मौखिक उल्लेख क्यों किया जा रहा है।
दिल्ली हाईकोर्ट क्यों नहीं गये
CJI सूर्यकांत ने कहा, आपने यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश के संज्ञान में क्यों नहीं लाया? आप सीधे मेरे सामने क्यों उल्लेख कर रहे हैं? क्या आप चाहते हैं कि मीडिया इस पर ध्यान दे? इस पर वकील ने जवाब दिया कि स्थानीय पुलिस कार्रवाई करने से डर रही है और वह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का सदस्य होने के नाते यह मामला शीर्ष अदालत के समक्ष उठा रहा है।
यह न्यायिक नहीं, प्रशासनिक मामला है – CJI
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि इस मामले को फिलहाल न्यायिक नहीं बल्कि प्रशासनिक स्तर पर देखा जाएगा। उन्होंने वकील को निर्देश दिया कि वह पूरी घटना की लिखित शिकायत दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सौंपे और उसकी एक प्रति उन्हें भी भेजे।
CJI ने सख्त लहजे में कहा, ‘मैं इसे प्रशासनिक तौर पर देखूंगा। न्यायिक पक्ष पर अभी कोई कार्रवाई नहीं होगी। पहले आप शिकायत दर्ज कराएं और दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को संज्ञान लेने दें। अदालतों में इस तरह का गुंडा राज बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’
न्यायपालिका की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस टिप्पणी के बाद यह मामला केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं रह जाता, बल्कि अदालत परिसरों की सुरक्षा, वकीलों की सुरक्षा और न्यायिक व्यवस्था की गरिमा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन जाता है।
अब सबकी निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है और क्या अदालतों के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कार्रवाई की जाती है या नहीं।


















