Increase diseases :
नई दिल्ली, एजेंसियां। दही आमतौर पर एक स्वास्थ्यवर्धक और पाचन के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह प्रोबायोटिक्स, कैल्शियम और हेल्दी फैट्स से भरपूर होता है। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार, मानसून के मौसम में इसका सेवन करना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। इस समय मौसम में बदलाव के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और दही जैसी ठंडी तासीर वाली चीजें कई समस्याओं को जन्म दे सकती हैं।
Increase diseases :मानसून में दही क्यों नहीं खाना चाहिए?
पाचन गड़बड़ी की आशंका
दही की तासीर ठंडी होती है।
मानसून में यह पाचन अग्नि को मंद कर देता है, जिससे गैस, अपच, पेट फूलना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इससे बचने के लिए दही में भुना जीरा, काली मिर्च या शहद मिलाकर खाना चाहिए।
Increase diseases :इम्यूनिटी को कर सकता है कमजोर
मानसून में इम्यून सिस्टम पहले से ही कमजोर होता है।
ऐसे में ठंडे डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे दही का सेवन बलगम को बढ़ाता है, जिससे सर्दी, खांसी, बुखार की चपेट में आने का खतरा होता है।
Increase diseases :सांस से जुड़ी परेशानियां

नियमित रूप से दही खाने से शरीर में कफ दोष बढ़ सकता है।
इससे सांस फूलना, छाती में जकड़न जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
मौसम की नमी इस खतरे को और बढ़ा देती है।
मानसून में दही खाने का सही तरीका क्या है?
अगर आप दही बिल्कुल बंद नहीं कर सकते, तो आयुर्वेद के मुताबिक इन सावधानियों का पालन करें:
दही में एक चुटकी काली मिर्च, भुना जीरा और थोड़ा सा काला नमक या शहद मिलाएं।
रात में दही का सेवन बिल्कुल न करें।
दही को ताजा और कम मात्रा में खाएं।
खट्टी दही से बचें, इससे एसिडिटी और पाचन दिक्कतें हो सकती हैं।
विशेष सलाह
यदि किसी को पहले से साइनस, अस्थमा, बार-बार सर्दी-जुकाम या पाचन की समस्या है, तो उन्हें मानसून में दही से परहेज ही करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी आयुर्वेद और सामान्य स्वास्थ्य सूत्रों पर आधारित है। किसी भी चिकित्सा सलाह के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।
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