Cigarette price hike
नई दिल्ली, एजेंसियां। सिगरेट पीने वालों के लिए 1 फरवरी से बड़ा झटका लगने वाला है। सरकार सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर नई एक्साइज ड्यूटी लागू करने जा रही है, जिससे इनकी कीमतों में भारी बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। सेहत के लिए नुकसानदेह मानी जाने वाली सिगरेट अब जेब पर भी पहले से कहीं ज्यादा भारी पड़ने वाली है।
अब सीधे सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगाने का फैसला
सरकार ने जीएसटी कंपेनसेशन सेस को हटाकर अब सीधे सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगाने का फैसला किया है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होगी। नए नियमों के मुताबिक, हर 1000 सिगरेट पर 2050 रुपये से लेकर 8500 रुपये तक एक्साइज ड्यूटी लगेगी, जबकि कुछ कैटेगरी में यह टैक्स 11 हजार रुपये तक भी पहुंच सकता है। यह ड्यूटी सिगरेट की लंबाई और वैरायटी के आधार पर तय की गई है। इसके साथ ही सिगरेट पर पहले से लागू 40 फीसदी जीएसटी भी जारी रहेगा।
सिगरेट की कीमत कितनी बढ़ सकती है?
जानकारों के मुताबिक, इस बदलाव के बाद सिगरेट पर कुल टैक्स का बोझ 60 से 70 फीसदी तक पहुंच सकता है, जो पहले 50 से 55 फीसदी के आसपास था। इसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, जो सिगरेट अभी करीब 18 रुपये में मिलती है, उसकी कीमत बढ़कर 70 से 72 रुपये तक हो सकती है। यानी स्मोकिंग अब आम आदमी के लिए कहीं ज्यादा महंगी आदत बन जाएगी।
नई एक्साइज ड्यूटी का असर
नई एक्साइज ड्यूटी का असर सिर्फ सिगरेट तक सीमित नहीं रहेगा। कच्चे तंबाकू पर 60 से 70 फीसदी तक टैक्स लगाया जाएगा, जबकि ई-सिगरेट और अन्य निकोटिन प्रोडक्ट्स पर 100 फीसदी ड्यूटी लगेगी। पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों पर हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस भी लगाया जाएगा। कुल मिलाकर, हर तरह के तंबाकू और नशे से जुड़े उत्पाद पहले से महंगे हो जाएंगे।
हालांकि, इस फैसले को लेकर एक्सपर्ट्स ने चिंता भी जताई है। उनका मानना है कि टैक्स में इतनी भारी बढ़ोतरी से लोग सिगरेट छोड़ने के बजाय सस्ती और अवैध, यानी तस्करी वाली सिगरेट की ओर रुख कर सकते हैं। भारत पहले से ही दुनिया का चौथा सबसे बड़ा अवैध सिगरेट बाजार माना जाता है, जहां करीब 26 फीसदी बाजार बिना टैक्स वाली सिगरेट के कब्जे में है। ऐसे में टैक्स बढ़ने से स्मगलिंग के और बढ़ने का खतरा जताया जा रहा है।
तंबाकू उगाने वाले किसानों की आय और रोजगार पर सीधा असर
तंबाकू किसानों की संस्थाओं ने भी इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि कानूनी सिगरेट की मांग घटने से तंबाकू उगाने वाले किसानों की आय और रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा। पहले ही खेती का रकबा घट रहा है और लागत बढ़ रही है, ऐसे में टैक्स बढ़ोतरी से मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
सरकार का तर्क
सरकार का तर्क है कि तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर लोगों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या महंगी सिगरेट लोगों को सच में स्मोकिंग छोड़ने पर मजबूर करेगी या फिर लोग जेब पर भारी बोझ उठाकर भी धुआं उड़ाते रहेंगे। फिलहाल इतना तय है कि 1 फरवरी के बाद सिगरेट पीना पहले से कहीं ज्यादा महंगा होने वाला है।
