Violent protests in Nepal:
काठमांडू, एजेंसियां। नेपाल में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद अब चीन की ओर से भी पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। चीनी विदेश मंत्रालय ने नेपाल से शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील की है, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि चीन ने अपने पारंपरिक सहयोगी ओली का नाम तक नहीं लिया।
Violent protests in Nepal: चीन का रुख
चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ न्यूज के अनुसार, बुधवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन और नेपाल के बीच पारंपरिक रूप से दोस्ताना और पड़ोसी रिश्ते रहे हैं। चीन को उम्मीद है कि नेपाल के सभी वर्ग घरेलू मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझाएंगे और जल्द ही सामाजिक व्यवस्था तथा क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करेंगे। हालांकि, उन्होंने ओली के इस्तीफे पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की।
Violent protests in Nepal: ओली पर चुप्पी क्यों?
केपी शर्मा ओली को चीन का करीबी नेता माना जाता है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नेपाल और चीन के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत किया था। इसके बावजूद, चीन ने अपने बयान में ओली का नाम न लेकर एक संतुलित रुख अपनाया, जिसे नेपाल के मौजूदा राजनीतिक हालात में सावधानीभरा कदम माना जा रहा है।
Violent protests in Nepal: नेपाल में हालात
नेपाल में Gen-Z आंदोलन सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सोमवार को हिंसक हो उठा। पुलिस कार्रवाई में कम से कम 19 लोगों की मौत हुई, जिससे हालात और बिगड़ गए। मंगलवार को दबाव में आकर प्रधानमंत्री ओली ने इस्तीफा दे दिया। प्रदर्शनकारियों ने संसद, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास और कई सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सेना की तैनाती करनी पड़ी।
नेपाल की राजनीति में यह घटनाक्रम न सिर्फ आंतरिक अस्थिरता को दिखाता है बल्कि पड़ोसी देशों, खासकर चीन और भारत की कूटनीतिक रणनीतियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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