Cheque bounce law
नई दिल्ली, एजेंसियां। चेक बाउंस या ऑटो-डेबिट (मैंडेट) फेल होना मामूली गलती नहीं है। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत यदि चेक बाउंस होने के बाद कानूनी नोटिस मिलने पर 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया जाता, तो आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है। इसमें अधिकतम 2 साल की जेल, चेक राशि का दोगुना जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है।
बैंक चेक या NACH मैंडेट फेल होने पर ₹250 से ₹750 तक पेनल्टी वसूल सकते हैं। EMI या क्रेडिट कार्ड भुगतान फेल होने पर लेट फीस और ब्याज अलग से जुड़ता है। बार-बार डिफॉल्ट से क्रेडिट स्कोर 50-70 अंक तक गिर सकता है, जिससे भविष्य में लोन महंगा या मुश्किल हो जाता है। हालांकि, कानूनी अपराध सिर्फ चेक बाउंस पर लागू होता है, मैंडेट फेल होने पर नहीं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संभावित डिफॉल्ट की स्थिति में पहले ही बैंक या लेंडर से संपर्क कर समाधान निकालें, ताकि कानूनी और वित्तीय जोखिम से बचा जा सके।
















