Cancer medicine overpricing:
नई दिल्ली, एजेंसियां। कैंसर की दवाओं की कीमतों में भारी अंतर को लेकर उठे गंभीर सवालों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। मामला पैक्लीटैक्सेल नाम की कीमोथेरेपी दवा से जुड़ा है, जिसकी खरीद कीमत करीब 600 रुपये बताई जाती है, जबकि बाजार में इसकी MRP 12,000 रुपये तक रखी जाती है। डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान मरीज को 20–30 वायल तक की जरूरत पड़ती है, जिससे खर्च कई गुना बढ़ जाता है और आर्थिक बोझ असहनीय हो जाता है।
कैंसर से करोड़ों परिवार बर्बाद:
इस मुद्दे को डॉक्टर अनुज कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उठाया। उन्होंने कहा कि कैंसर पहले ही करोड़ों परिवारों को बर्बाद कर चुका है और अब दवाइयों पर 1900% तक का मार्जिन पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। उनका कहना था कि 200% मार्जिन को भी समझा जा सकता है, लेकिन 1900% जैसे अंतर को किसी भी तरीके से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
इरफान अंसारी का आदेश:
शिकायत सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और सभी जिलों के उपायुक्तों को तत्काल जांच करने का निर्देश दिया है। सीएम ने कहा कि दवाओं की कीमतों में अनियमितता किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ी तो सख्त कार्रवाई होगी। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, कई कीमोथेरेपी दवाओं में खरीद और MRP के बीच बड़ा अंतर लंबे समय से देखा जाता रहा है, लेकिन 600 रुपये की दवा पर 12,000 रुपये का MRP बेहद चिंताजनक मामला है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मरीजों के परिवार और स्वास्थ्य जागरूकता समूह इस घटनाक्रम को स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देख रहे हैं।







