Rapid cancer test:
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। अब गंभीर बीमारियों की पहचान पहले से अधिक तेज और सटीक तरीके से संभव हो रही है। खासकर कैंसर जैसी बीमारी, जिसमें समय पर जांच और उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है, वहां एआई आधारित तकनीक नई उम्मीद लेकर आई है।मीडिया से बातचीत में विप्रो की चीफ टेक्निकल ऑफिसर संध्या अरुण ने बताया कि एक विशेष एआई-संचालित डिवाइस तैयार की गई है, जो महज 30 से 45 मिनट के भीतर कैंसर के संकेतों की पहचान करने में मदद कर सकती है। उनका कहना है कि यह तकनीक जांच प्रक्रिया को न सिर्फ तेज बनाती है, बल्कि ज्यादा भरोसेमंद और सटीक भी बनाती है। इससे मरीजों को समय पर इलाज शुरू करने में बड़ी सहायता मिल सकती है।
कैसे काम करती है यह मशीन?
यह एआई-आधारित रोबोटिक एमआरआई मशीन मरीज के शरीर, खासकर पेट के हिस्से का स्कैन करती है। स्कैनिंग के दौरान रीयल टाइम में इमेज और डेटा स्क्रीन पर दिखाई देता है, जिससे डॉक्टर तुरंत स्थिति का आकलन कर सकते हैं। मशीन में लगे एआई एल्गोरिदम स्कैन में दिखाई देने वाले ट्यूमर या संदिग्ध हिस्सों का विश्लेषण करते हैं और संभावित कैंसर के संकेतों की पहचान करते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार, यह सिस्टम डीप लर्निंग तकनीक का उपयोग करता है। मशीन स्कैन के दौरान प्राप्त डेटा को पूर्व में उपलब्ध मेडिकल डेटा से तुलना करती है और तेजी से निष्कर्ष निकालने में मदद करती है। इससे पारंपरिक जांच प्रक्रिया की तुलना में समय की बचत होती है।
चार आर्म से पूरी बॉडी स्कैन
इस मशीन में चार अलग-अलग आर्म दिए गए हैं, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों का स्कैन करने में सक्षम हैं। सामान्यत: शरीर के मध्य भाग के लिए मुख्य स्कैनर आर्म का उपयोग किया जाता है, जबकि अन्य हिस्सों के लिए अलग-अलग आर्म मदद करते हैं। इससे पूरे शरीर की व्यापक जांच संभव हो पाती है।बताया गया है कि यह भारत में निर्मित पहली एआई-संचालित एमआरआई मशीन है। यह स्कैनिंग समय में लगभग 37 प्रतिशत तक की कमी लाती है और 75 प्रतिशत तक हीलियम की खपत घटाती है, जिससे यह तकनीक अधिक टिकाऊ और किफायती भी बनती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक व्यापक स्तर पर लागू होती है, तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की शुरुआती पहचान में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है और लाखों मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा।








