RSS chief Mohan Bhagwat: धर्म की रक्षा करने से ही सब की रक्षा होती है”, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

Anjali Kumari
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RSS chief Mohan Bhagwat:

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने धर्म की रक्षा और सामाजिक समरसता को लेकर एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा करने से ही समाज और देश की रक्षा संभव है। इसके साथ ही उन्होंने स्वदेशी को बढ़ावा देने, आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम उठाने और भारतीयता को प्राथमिकता देने की बात की।

भागवत जी दिल्ली में चल रहे आरएसएस के ‘100 वर्ष की संघ यात्रा – नए क्षितिज’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने संघ के उद्देश्यों और कार्यों पर प्रकाश डालते हुए समाज की एकता की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

संघ की स्थिति:

मोहन भागवत ने कहा कि अब संघ के प्रति समाज में अनुकूलता बढ़ी है और विरोध भी कम हुआ है। विरोध की धार भी अब कमजोर पड़ गई है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह सफलता से आराम नहीं करना है और संघ को सतत अपने कार्यों में जुटे रहना है।

स्वदेशी और आत्मनिर्भरता:

उन्होंने जोर दिया कि देश को आत्मनिर्भर होना चाहिए और इसके लिए स्वदेशी का उपयोग प्राथमिकता होनी चाहिए। अपने समाज, देश और राष्ट्र के लिए हर व्यक्ति को योगदान करना चाहिए।

धर्म की महत्ता:

भागवत ने धर्म की रक्षा को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था, “धर्म की रक्षा करने से सब की रक्षा होती है। धर्म हमारे जीवन के लिए मार्गदर्शक है, यह एक मध्यम मार्ग है, जो जीवन में संतुलन और समृद्धि लाता है।”

सामाजिक समरसता:

समाज में वंचित वर्ग के लिए समानता और समरसता को सुनिश्चित करने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना जरूरी है। मंदिर, पानी, श्मशान में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय संबंध:

मोहन भागवत ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्वेच्छा को प्राथमिकता देने की बात की। उन्होंने कहा कि भारत को अपने पारंपरिक रूप में एकजुट रहकर विश्व से जुड़ने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन किसी भी दबाव में नहीं।

संघ का भविष्य:

उन्होंने कहा कि संघ का काम केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे समाज में हो रहा है। देशभक्ति और समरसता को बढ़ावा देना संघ का मुख्य उद्देश्य है।

भ्रष्टाचार और कट्टरता:

मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में कट्टरपंथ बढ़ रहा है और इसका सामना करने के लिए धर्म को सच्चाई और प्रेम के आधार पर आगे बढ़ाना होगा।

भागवत ने इस अवसर पर समाज में एकता की आवश्यकता को भी बल देते हुए कहा कि जितना बुरा भारत में दिखता है, उससे कहीं ज्यादा अच्छा है। उन्होंने अपने विचारों में समाज को जागरूक किया और बताया कि हमें अपने इतिहास और संस्कृति को समझकर भविष्य के लिए रास्ता तैयार करना होगा।

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