Breast lump causes:
नई दिल्ली, एजेंसियां। महिलाएं अक्सर जब भी अपने ब्रेस्ट में कोई गांठ महसूस करती हैं, तो पहला ख्याल उन्हें ब्रेस्ट कैंसर का आता है। यह डर स्वाभाविक है, लेकिन विशेषज्ञों और हालिया स्टडी के अनुसार, ब्रेस्ट में पाई जाने वाली लगभग 80-85 प्रतिशत गांठें नॉन-कैंसरस (benign) होती हैं। इसका मतलब है कि हर गांठ कैंसर नहीं होती, और इनमें से अधिकांश केवल ऊतकों की असामान्य वृद्धि या तरल पदार्थ से भरी थैलियां होती हैं।
ब्रेस्ट में गांठ बनने के आम कारण
ब्रेस्ट में गांठ का सबसे आम कारण फाइब्रोसिस्टिक परिवर्तन है, जो लगभग 50-60% महिलाओं को प्रभावित करता है। यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि हार्मोनल बदलावों के प्रति शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। ओव्यूलेशन और मासिक धर्म के दौरान हार्मोन के उतार-चढ़ाव से छोटे-छोटे तरल पदार्थ से भरे सिस्ट या रेशेदार गांठें बन जाती हैं। ये गांठें अक्सर मासिक धर्म से पहले कोमल या हल्की दर्द वाली हो सकती हैं, लेकिन ये पूरी तरह सुरक्षित होती हैं।
18 से 35 वर्ष की महिलाओं में फाइब्रोएडेनोमा सबसे आम होता है। इसे ‘ब्रेस्ट माउस’ भी कहा जाता है क्योंकि यह छूने पर त्वचा के नीचे रबर की तरह इधर-उधर खिसकता है। यह दर्द रहित होता है और कैंसर का खतरा लगभग न के बराबर होता है।
कैंसरयुक्त गांठ की पहचान
हालांकि अधिकांश गांठें सुरक्षित होती हैं, लेकिन कैंसर की गांठें अक्सर बहुत सख्त, स्थिर और दर्द रहित होती हैं। अन्य संकेतों में शामिल हैं:
- निप्पल का आकार बदलना या खून जैसा डिस्चार्ज
- त्वचा में डिंपल या गड्ढे
- गांठ का स्थिर और हिलने-डुलने में न होना
स्टडी के अनुसार, 50% कैंसर की गांठें ब्रेस्ट के ऊपरी बाहरी हिस्से में पाई जाती हैं।
जांच और सावधानी
किसी भी गांठ की प्रकृति जानने का सबसे सटीक तरीका बायोप्सी है। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या मैमोग्राम के बाद बायोप्सी की सलाह देते हैं। स्टडी बताती है कि 80% बायोप्सी रिपोर्ट में गांठ को बेनाइन ही पाया जाता है।
महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे हर महीने सेल्फ-ब्रेस्ट एग्जाम करें और किसी भी नए बदलाव पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। शुरुआती पहचान और समय पर जांच ही ब्रेस्ट कैंसर से सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है।








