Bangladesh elections:
ढाका, एजेंसियां। बांग्लादेश में अगले साल प्रस्तावित आम चुनाव से पहले राजनीतिक हालात एक बार फिर पेचीदा हो गए हैं। देश की सबसे बड़ी इस्लामवादी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने साफ कहा है कि जब तक प्रस्तावित राष्ट्रीय चार्टर पर जनमत संग्रह नहीं कराया जाता, तब तक चुनाव नहीं होना चाहिए। इससे बांग्लादेश के चुनावी कैलेंडर पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
जमात की चेतावनी
राजधानी ढाका में मंगलवार को सात सहयोगी इस्लामवादी दलों के साथ आयोजित एक रैली में जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने कहा कि चार्टर को कानूनी आधार दिए बिना आम चुनाव संभव नहीं है। उनका कहना था कि चुनाव तभी होंगे जब मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की अगुवाई में तैयार राष्ट्रीय आम सहमति आयोग का चार्टर जनता की मंजूरी हासिल करेगा।
बीएनपी से बढ़ा टकराव
जमात का यह रुख पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के साथ टकराव पैदा कर चुका है। बीएनपी ने जनमत संग्रह के विचार को संविधान-विरोधी बताते हुए खारिज कर दिया है। बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि “जमात चुनाव से डर रही है क्योंकि उसे हार का भय है।”
चार्टर बना विवाद की जड़
पिछले महीने दोनों दलों ने 84 प्रस्तावों वाले इस राष्ट्रीय चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन इसके लागू होने की प्रक्रिया को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। जमात चाहती है कि चार्टर को पहले जनमत से वैधता दी जाए, जबकि बीएनपी का कहना है कि संविधान में जनमत संग्रह का कोई प्रावधान नहीं है।
अंतरिम सरकार की सख्त स्थिति
बीएनपी ने यह भी आरोप लगाया है कि आयोग ने कई असहमति नोट्स हटा दिए हैं जो संविधान के विपरीत बिंदु थे। वहीं, सात दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद अब अंतरिम प्रशासन जनमत संग्रह और चार्टर के क्रियान्वयन पर एकतरफा फैसला लेने की तैयारी में है।ऐसे में फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों पर संशय गहराता जा रहा है।

